फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand Assembly Monsoon Session 2021: Opposition raises many issues and CM done Many Announcement

उत्तराखंड विधानसभा सत्र: विपक्ष ने चलाए मुद्दों के शस्त्र तो सीएम ने छोड़े घोषणाओं के अस्त्र 

Sat, 28 Aug 2021 12:49 PM IST
अलका त्यागी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 28 Aug 2021 12:49 PM IST
सार

सत्र के दौरान सदन के बाहर और भीतर विपक्ष हमलावर दिखा भी। लेकिन, हंगामे और शोरगुल के जरिये सदन की कार्यवाही को बाधित करने की बजाय उसने ज्यादा से ज्यादा मुद्दों को उठाने का विकल्प चुना।

विज्ञापन
Uttarakhand Assembly Monsoon Session 2021: Opposition raises many issues and CM done Many Announcement
सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड की चौथी विधानसभा का आखिरी सत्र माने जा रहे मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार पर महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के कई शस्त्र छोड़े। जवाब में मुख्यमंत्री ने टकराने के बजाय बीच का रास्ता चुना। वह जब-जब सदन में आए, उन्होंने लोकलुभावन घोषणाओं का पिटारा खोला। पांचवें और सरकार के विधायी कामकाज के लिहाज से आखिरी दिन सीएम ने छात्र-छात्रों से लेकर पुलिस और पंचायत और राजस्व कर्मियों तक के लिए सरकार का खजाना खोल दिया।

विज्ञापन


चुनावी साल में हो रहे इस विधानसभा सत्र के दौरान इस बात की संभावना जताई जा रही थी कि विपक्ष सदन में बेहद हमलावर दिखेगा। कद्दावर नेत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश व पूर्व राज्यपाल व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह समेत सात दिवंगत नेताओं के प्रति शोक संवेदनाओं से शुरू हुआ सत्र का सिलसिला जब आगे बढ़ा तो सबकी निगाहें पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में सदन में पहुंचे पुष्कर सिंह धामी, पहली बार नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा प्रीतम सिंह व संसदीय कार्यमंत्री बंशीधर भगत के प्रदर्शन पर लगी थी। 
विज्ञापन


उत्तराखंड विधानसभा सत्र: आज सतत विकास के लक्ष्य पर होगी चर्चा, सत्ता और विपक्ष के विधायक देंगे सुझाव
विज्ञापन
विज्ञापन


सत्र के दौरान सदन के बाहर और भीतर विपक्ष हमलावर दिखा भी। लेकिन, हंगामे और शोरगुल के जरिये सदन की कार्यवाही को बाधित करने की बजाय उसने ज्यादा से ज्यादा मुद्दों को उठाने का विकल्प चुना। जहां जरूरी समझा वहां बहिर्गमन किया। बेरोजगारी, महंगाई, भगवानपुर में मेडिकल कॉलेज और कृषि कानून के मसले पर सदन से बाहर निकले। 

देवस्थानम और भू कानून के मुद्दे पर प्राइवेट बिल के बहाने कांग्रेस विधायक मनोज रावत और हरीश धामी सदन में अपनी बात रखने में कामयाब रहे। पांच दिन में करीब 28 घंटे 22 मिनट चला सदन सदन में चिर प्रतिदं्वद्वी प्रीतम सिंह और मुन्ना सिंह चौहान और हरक बनाम प्रीतम के बीच तीखी बहस का गवाह बना। बीच-बीच में अपने मजाकिया अंदाज में तीखे तंज करके काबीना मंत्री हरक सिंह ने माहौल को गुदगुदाया और जिससे कुछ मौकों पर सदन की नीरसता टूटी। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने धीर-गंभीर अंदाज में सरकार के मंत्रियों पर तीर छोड़े और उन्हें असहज किया। 

सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी के बीच मुख्यमंत्री जब-जब सदन में आए, घोषणाओं का पिटारा साथ लाए। जब पुलिस कर्मियों के ग्रेड पे को लेकर सदन गरमाया तो उन्होंने सदन में पुलिस के जवानों को आश्वस्त किया। इसके बाद वह सदन में आते गए और घोषणाओं के अस्त्र छोड़ते गए। 

पहले तीन लाख कर्मचारियों व पेंशनरों के लिए डीए की घोषणा की। दूसरी बार 200 करोड़ रुपये की बिजली, पानी व परिवहन के टैक्स व बिलों की माफी व आर्थिक सहायता की घोषणा की और शुक्रवार को तीसरी बार उन्होंने एक लाख डिग्री कॉलेज के छात्रों को मुफ्त टैबलेट देने व पुलिस, राजस्व समेत अन्य वर्गों के कर्मचारियों के प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। यह उनके सहज अंदाज का ही असर था कि विपक्ष ने सदन में उनकी प्रशंसा की। विपक्षी हमले की तोप का मुंह मुख्यमंत्री के बजाय मंत्रियों की ओर था।

सदन में जब-जब सदस्य परंपराओं की पटरी से उतरे पीठ पर विराजमान 

स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल सख्ती के साथ उन्हें खबरदार किया। उनकी सख्ती का अंदाज यह रहा कि उनके आदेश पर सदन में बातचीत करने पर सत्ता पक्ष के विधायक संजय गुप्ता का फोन तक जब्त किया गया। मंत्रियों डॉ. हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल और डॉ. धनसिंह सदन में होमवर्क दिखा, लेकिन बाकी मंत्रियों की उतनी मेहनत नहीं दिखी। संसदीय कार्यमंत्री बंशीधर भगत का उत्साह भी सदन में देखते ही बना। कई मौकों पर उन्होंने आत्मविश्वास में दिखाया।  

परिपक्व और सधे अंदाज में नजर आए धामी
युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधानसभा सत्र के दौरान सदन के बाहर और सदन के भीतर खासे परिपक्व नजर आए। उन्होंने बेहद सधे अंदाज में अपने विपक्षी सदस्यों को हैंडल किया। बीच-बीच में वह सदन में आए और बड़ी घोषणाएं कर चले गए। इस दौरान कभी भी वह कर्कश नहीं सुनाई दिए। बहुत क्रोधित या खिन्न होने से भी उन्होंने खुद को बचाया। उन्होंने इस आरोप को झुठला दिया कि उनके पास अनुभव की कमी है। वह मध्यमार्ग के रणनीतिकार के तौर पर उभरे। 

युवा मुख्यमंत्री पर लगी थीं सबकी निगाहें
युवा मुख्यमंत्री की सदन में भूमिका पर विपक्षी ही नहीं सत्ता पक्ष के विधायकों की भी निगाह लगी थी। सत्र के दूसरे दिन विधानसभा में विपक्ष के विधायक हरीश धामी और मनोज रावत धरने पर बैठ गए। अनायास वहां पहुंचकर सीएम ने दोनों विधायकों को न सिर्फ मनाया बल्कि एक परिपक्व राजनेता की तरह उन्होंने मुख्य सचिव की मौजूदगी में उनके मसले पर बैठक की। फिर कांग्रेस विधायक ममता राकेश और फुरकान अहमद धरने पर बैठे तो सीएम ने फिर सहृदयता दिखाते हुए उन्हें उसी अंदाज में मनाया और बैठक की। उनकी इस सहजता का ही परिणाम था कि विरोधी खेमों से भी उनकी प्रशंसा के स्वर सुनाई दिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed