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Uttarakhand Chunav 2022: महाराज जहां जीत को दोहाना चाहते हैं, वहीं कांग्रेस को पहली जीत का है इंतजार 

Sun, 13 Feb 2022 11:19 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 13 Feb 2022 11:19 AM IST
सार

त्रिवेंद्र, तीरथ या धामी तीनों मुख्यमंत्रियों ने हमेशा ही महाराज के कद व पद का सम्मान किया है। भाजपा ने उन्हें एकबार फिर चुनावी समर में उतारा है।

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Uttarakhand Assembly Election 2022: chaubattakhal seat ground report
सतपाल महाराज - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड की वर्तमान सियासत में चौबट्टाखाल विधान सभा सीट सबसे हॉट सीटों में गिनी जा रही है। इस सीट से विधायक सतपाल महाराज प्रदेश सरकार की कैबिनेट में नंबर दो का ओहदा संभाले हुए हैं। त्रिवेंद्र, तीरथ या धामी तीनों मुख्यमंत्रियों ने हमेशा ही महाराज के कद व पद का सम्मान किया है। भाजपा ने उन्हें एकबार फिर चुनावी समर में उतारा है। महाराज जहां अपनी जीत को दोहराना चाहते हैं। वहीं कांग्रेस को इस सीट से पहली जीत का इंतजार हैं।

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कांग्रेस ने पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व जिला पंचायत पौड़ी के पूर्व अध्यक्ष केशर सिंह नेगी को चुनाव मैदान में उतारा है। आम आदमी पार्टी ने चौबट्टाखाल से जीत का दारोमदार प्रत्याशी दिगमोहन नेगी के कंधों पर रखा है। जबकि इस सीट पर कुल 9 प्रत्याशी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। 
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जनपद पौड़ी की विधान सभा सीट चौबट्टाखाल वर्ष 2012 में अस्तित्व में आयी थी। इस सीट का अधिकत्तर हिस्सा वर्ष 2002 से 2012 तक बीरोंखाल विधान सभा में शामिल था। बीरोंखाल सीट से 2002 व 2007 में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत लगातार विधायक रही। वर्ष 2012 में चौबट्टाखाल सीट से भाजपा प्रत्याशी के रुप में पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने जीत दर्ज की थी।

2017 में पार्टी ने उनके स्थान पर सतपाल महाराज को चुनाव मैदान में उतारा और महाराज को जीत हासिल हुई। वर्तमान में भी कांग्रेस व भाजपा में सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। लेकिन आम आदमी पार्टी प्रत्याशी दिगमोहन नेगी चौबट्टाखाल के रण को त्रिकोणीय स्वरुप देने में जी-जान से जुटे हुए हैं। इसके अलावा यहां उत्तराखंड क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) के प्रत्याशी अनु पंत, उत्तराखंड रक्षा मोर्चा प्रत्याशी शेखर सिंह, उत्तराखंड क्रांति दल के प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह रावत, समाजवादी पार्टी प्रत्याशी जयप्रकाश, निर्दलीय अरुण कुमार व अश्वनी कुमार भी मतदाताओं को अपने पक्ष में मतदान करने के लिए रिझाने की कोशिश कर रहे हैं। 

कुल मतदाता- 91136
पुरुष मतदाता- 45677
महिला मतदाता- 45459
सर्विस मतदाता- 3484

ग्राउंड रिपोर्ट
चौबट्टाखाल सीट 2012 में अस्तित्व में आई और यहां से पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत विधायक चुने गए। वर्ष 2017 में चौबट्टाखाल में भाजपा प्रत्याशी सतपाल महाराज की विजय मिली। यह क्षेत्र इससे पहले बीरोंखाल विधान सभा में शामिल था। जहां 2002 व 2007 में महाराज की पत्नी अमृता रावत विधायक बनी।

स्थानीय मुद्दे
सतपुली व स्यूंसी झील का अभी अस्तित्व में नहीं आ पाना, व्यास चट्टी से सतपुली, ज्वाल्पा-कनमोठलिया पुल- मांसौं-पाबौ- पैठाणी-कर्णप्रयाग मोटर मार्ग को चारधाम यात्रा सर्किट से जोड़ना, द्वारीखाल ब्लाक के भैरवगढ़ी व पोखड़ा के दीवाडांडा में रोपवे की घोषणा, 13 जिले-13 डेस्टीनेशन के तहत खैरासैण का विकास न होना, बीरोखाल को पृथक जिला बनाए जाने की मांग अधूरी, विकास खंडों का परिसीमन।

चौबट्टाखाल विधान सभा क्षेत्र में विगत पांच वर्षों के दौरान 1 अरब की धनराशि के विकास कार्य हुए हैं। डबल इंजन की सरकार ने ग्रामीण स्तर पर पेयजल, विद्युत, सड़क सुविधाओं को मजबूत बनाया है। पर्यटन की दृष्टि से क्षेद्घ में झीलों, होमस्टे, ट्रैकिंग रुट विकसित किए गए हैं। क्षेत्र में आगामी पांच सालो में विकास के रोडमैप को तैयार कर लिया गया है। जिसे धरातल पर उतारा जाएगा। पलायन को थामने के लिए गांवों को सुविधा संपन्न बनाए जाने के साथ ही रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे।

-सतपाल महाराज, भाजपा प्रत्याशी व पर्यटन एवं लोनिवि मंत्री उत्तराखंड सरकार

भाजपा ने क्षेत्र की जनभावनाओं से खिलवाड़ करने का काम किया है। कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए चौबट्टाखाल विधान सभा क्षेत्र में अनेक विकास कार्य किए, जिन पर भाजपा ने सत्ता में आने के बाद रोक लगा दी। कांग्रेस क्षेत्र के विकास के प्रति प्रतिवद्घ है। स्थानीय विधायक महाराज का कार्यकाल पूरी तरह निराशाजनक रहा है। जनता कांग्रेस की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है। जो 10 मार्च को परिणाम के रुप में हमारे सामने होगा।
 -केशर सिंह नेगी, कांग्रेस प्रत्याशी

भाजपा- कांग्रेस ने राज्य गठन की संकल्पना को तार-तार करने का काम किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के अभाव में गांव खाली हा रहे हैं। अनेक गांवों में आज भी सड़कें नहीं हैं, जहां हैं वे खस्ताहाल पड़ी हैं। पेयजल की सुविधा का गांवों में अभाव है। स्थानीय विधायक सतपाल महाराज व उनकी पत्नी अमृता रावत ने क्षेत्र के विधायक बनने के बाद सरकार में पद जरुर लिया। लेकिन क्षेत्र को विकास के नाम पर उपेक्षा की ही सौगात दी है। पहाड़ों में सर्विस इंडस्ट्रीज विकसित की जाएंगी।
- दिगमोहन नेगी, आप प्रत्याशी

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