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जहरीली शराब कांड: विस समिति की रिपोर्ट सत्र में हुई पेश, घेरे में जिला प्रशासन और आबकारी विभाग

Sat, 23 Feb 2019 08:33 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 23 Feb 2019 08:33 AM IST
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Uttarakhand assembly committee report on ,poisonous liquor case submit

हरिद्वार के झबरेड़ा में हुए जहरीली शराब प्रकरण में विस की समिति ने अपनी रिपोर्ट सदन के पटल पर पेश कर दी है। सूत्रों के अनुसार समिति ने अपनी रिपोर्ट में हरिद्वार जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं तो आबकारी विभाग की निष्क्रियता को भी घेरे में लिया गया है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार की ओर से एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) विधानसभा में पेश की जाएगी।

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विगत सात और आठ फरवरी की रात हरिद्वार के झबरेड़ा में लोगों ने कच्ची शराब का सेवन किया। आठ फरवरी की सुबह से लोगों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ और अब तक जारी है। विगत दिवस एक और व्यक्ति की मौत के बाद यह आंकड़ा 42 तक पहुंच गया है। इतनी ज्यादा मौतों से शासन और प्रशासन में हड़कंप मच गया। सरकार की ओर से कई अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया।
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विपक्ष ने यह मामला विस सत्र के दौरान सदन में उठाया तो स्पीकर प्रेम चंद अग्रवाल ने विधायक खजान दास की अध्यक्षता में विधायकों की एक सात सदस्यीय समिति का गठन कर दिया। इस समिति को घटना की वजह जानने के साथ ही अन्य सभी बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट देनी थी। समिति की ओर से यह रिपोर्ट शुक्रवार को सदन के पटल पर रखी गई। पीठ की ओर से यह रिपोर्ट आवश्यक कार्रवाई के लिए सरकार को दे दी गई है।
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बताया जा रहा है कि समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले मौके पर जाकर ग्रामीणों और प्रभावितों के परिजनों से तो बातचीत की ही, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य, आबकारी विभाग के अफसरों से भी लंबी पूछताछ की। सूत्रों ने बताया कि समिति ने अपनी 14 पेज की इस रिपोर्ट में हरिद्वार के जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

इसके साथ ही हरिद्वार जिले के आबकारी विभाग की निष्क्रियता को भी सवालों के घेरे में लिया गया है। समिति ने यह भी कहा कि जिस केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, उस पर स्वास्थ्य विभाग के अधीन आने वाले ड्रग विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि समिति ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस महकमे खास कर कच्ची शराब के लिए कुख्यात क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। यह रिपोर्ट अब सरकार को के हवाले कर दी गई है।

शराब कारोबार पर अध्ययन को बना आयोग
सरकार ने राज्यभर में शराब कारोबार में आ रहीं तमाम दिक्कतों के अध्ययन और उनके निस्तारण के लिए सुझाव देने को एक सदस्यीय आयोग का गठन किया है। इस आयोग का अध्यक्ष राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एनएस नपल्च्याल को बनाया गया है। इस आयोग को छह माह में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने इस आयोग के गठन की पुष्टि की। विभागीय मंत्री पंत ने बताया कि आयोग के दायरे में कच्ची और अवैध शराब के साथ ही पूरा शराब कारोबार होगा। आयोग देखेगा कि किन-किन स्तरों पर क्या-क्या समस्याएं आ रहीं हैं और उनका निस्तारण या उन पर नियंत्रण किस तरह से हो सकता है। 

विस के पटल पर पेश विस की समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार जल्द ही एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) विस में पेश करेगी।
-प्रकाश पंत, संसदीय कार्य मंत्री (सदन में बोले)

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