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उत्तराखंड: प्रदेश को 25 साल तक मिलेगी 1234 मेगावाट बिजली, अडानी पावर के साथ हुए करार पर आयोग ने लगाई मुहर

Sat, 31 Oct 2026 01:54 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Sat, 31 Oct 2026 01:54 PM IST
सार

राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कम करने के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था की गई है। इससे आने वाले वर्षों में बिजली संकट के दौरान महंगे दामों पर बिजली खरीदने की निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने अडानी पावर के साथ हुए समझौते और टैरिफ को मंजूरी दे दी है।

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Uttarakhand approves 1,234 MW power purchase agreement with adani power at Rs 5.746 per unit for 25 years
बिजली

विस्तार

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) और ऊर्जा कंपनी अडानी पावर लिमिटेड के बीच 25 वर्षों के लिए 1234 मेगावाट बिजली खरीद के समझौते और टैरिफ को औपचारिक मंजूरी दे दी है। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने इस महत्वपूर्ण याचिका पर फैसला सुनाते हुए 5.746 प्रति यूनिट की प्रतिस्पर्धी दर को स्वीकृति दे दी।

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इस दीर्घकालिक समझौते से राज्य को वित्तीय वर्ष 2030-31 से 24 घंटे निर्बाध बिजली मिलनी शुरू हो जाएगी, जिससे गर्मियों और सर्दियों में अक्सर गहराने वाले बिजली संकट और महंगे दामों पर एक्सचेंज से तुरंत बिजली खरीदने की मजबूरी से पूरी तरह निजात मिलेगी। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी शक्ति नीति के तहत राज्य को आवंटित कोयला लिंकेज का इस्तेमाल करते हुए 1320 मेगावाट क्षमता के ग्रीनफील्ड थर्मल पावर प्लांट से बिजली जुटाने की योजना बनाई गई।

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तीन में से अडानी पावर ने ऐसे मारी बाजी

ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत तकनीकी रूप से पांच कंपनियां पात्र पाई गई थीं, जिनमें से अंततः तीन कंपनियों ने अपनी वित्तीय बोलियां पेश कीं। इसमें अडानी पावर लिमिटेड ने 5.746 प्रति यूनिट, एमबी पावर (मध्य प्रदेश) लिमिटेड ने 6.237 प्रति यूनिट और ललितपुर पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड ने 6.750 प्रति यूनिट की बोली लगाई। दिलचस्प बात यह है कि तीनों ही कंपनियों का बेसिक फ्यूल चार्ज 1.147 प्रति यूनिट था। लेकिन बाजी कोयला खदान से प्लांट की दूरी और मालभाड़े पर तय हुई। अडानी पावर का प्रस्तावित प्लांट कोयला खदान से महज करीब 149.37 किमी दूर है, जिससे उनका ढुलाई खर्च सिर्फ 0.299 प्रति यूनिट आया। वहीं अन्य प्रतिद्वंद्वी कंपनियों का कोयला परिवहन खर्च क्रमशः 0.570 और 1.213 प्रति यूनिट तक पहुंच गया। सबसे कम दर पेश करने के चलते अडानी पावर को यह मेगा प्रोजेक्ट आवंटित हुआ।

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उपभोक्ताओं की जेब पर क्या असर

नियामक आयोग ने देश के अन्य राज्यों (जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, बिहार) के हालिया पावर टेंडरों से तुलना करने के बाद पाया कि मौजूदा बाजार रुख के हिसाब से अडानी पावर का 5.746 प्रति यूनिट का रेट बेहद प्रतिस्पर्धी और उचित है। इसमें 4.300 प्रति यूनिट का बेस फिक्स्ड चार्ज और 1.446 प्रति यूनिट का ईंधन व परिवहन चार्ज शामिल है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब यह बिजली मिलनी शुरू होगी तो उपभोक्ताओं को बाजार की महंगी बिजली से राहत मिलेगी। ढाई दशक तक सस्ती दरों पर बिजली मिलती रहेगी। प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के दौरान बदलाव या अन्य दावों पर आयोग ने कोई खुली छूट देने से मना किया है। अब यूपीसीएल और अडानी पावर के बीच औपचारिक अनुबंध का रास्ता साफ हो गया।
 

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