फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand 2000 Private Hospital Doctors will on Hunger strike on 31 July

उत्तराखंड के 2000 से ज्यादा निजी अस्पतालों में बुधवार को हड़ताल पर रहेंगे डॉक्टर, नहीं चलेगी ओपीडी

Wed, 31 Jul 2019 08:39 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 31 Jul 2019 08:39 AM IST
विज्ञापन
Uttarakhand 2000 Private Hospital Doctors will on Hunger strike on 31 July
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

संसद में नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पारित होने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन उत्तराखंड की आपात बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। आंदोलन के पहले चरण में एसोसिएशन से जुड़े राज्य के 2000 से अधिक निजी अस्पतालों में बुधवार सुबह छह बजे से लेकर बृहस्पतिवार सुबह छह बजे तक डॉक्टर ओपीडी का बहिष्कार करेंगे। हालांकि, इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेगी। एसोसिएशन सभी जिलों में धरना प्रदर्शन के साथ भूख हड़ताल शुरू करने की तैयारी में है।

विज्ञापन


बैठक में प्रदेश सचिव डॉ. डीडी चौधरी ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पारित होने के बाद अब धारा-32 के तहत देश भर में साढ़े तीन लाख से अधिक पैरा मेडिकल स्टाफ डॉक्टरों की तर्ज पर मरीजों का इलाज कर सकेंगे। इसके लिए पैरा मेडिकल को सिर्फ ब्रिज कोर्स करना होगा। प्रदेश सचिव ने कहा कि इस प्रावधान का पूरजोर विरोध किया जाएगा। साथ ही बिल लागू होते ही देश में चिकित्सा शिक्षा बेहद मंहगी हो जाएगी।
विज्ञापन


निजी मेडिकल कालेज छात्रों से मनमानी फीस वसूलेंगे और इस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होगा। आईएमए की बैठक में डॉक्टरों ने इसे काला कानून बताते हुए इसके बहिष्कार की घोषणा की। बैठक में आईएमए के अध्यक्ष डॉ. बीएस जज भी उपस्थित थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

हड़ताल से बढ़ेगी मरीजों के लिए मुसीबत

नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में आईएमए के आह्वान पर 24 घंटे के ओपीडी बहिष्कार से मरीजों के लिए समस्याएं बढ़ना तय हैं। 24 घंटे के दौरान न डॉक्टर मरीजों की जांच करेंगे और न कोई पैथोलॉजी जांच हो पाएगी। जबकि, राजधानी के निजी अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना भारी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में इन मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।

सरकारी डॉक्टरों ने साधी चुप्पी
एक तरफ बिल के विरोध में निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है, वहीं सरकारी डॉक्टरों के संगठन प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ (पीएमएस) ने मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। पीएमएस के अध्यक्ष डॉ. डीपी जोशी ने बताया कि प्रकरण को लेकर चार अगस्त को मुंबई में बैठक बुलाई गई थी जो फिलहाल कुछ कारणों के चलते टल गई है। इस मुद्दे पर एसोसिएशन पदाधिकारियोें, डॉक्टरों से वार्ता करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

दून अस्पताल में तैयारियां पूरी
निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए तैयारी कर ली है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था की गई है। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का इलाज किया जाएगा। मरीजों को दिक्कत न हो, इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

नेशनल मेडिकल कमीशन बिल को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। यह बिल डॉक्टरों के हितों की अनदेखी कर बनाया गया है। इस काले कानून के लागू होने के बाद देश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगी। बिल लागू होने के बाद मेडिकल की पढ़ाई बहुत मंहगी हो जाएगी। इस कानून का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
-डॉ. डीडी चौधरी,  प्रदेश सचिव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed