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उपनलकर्मियों की हड़ताल खत्म, कई दौर की बातचीत के बाद फैसला

Sat, 16 Jul 2016 08:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 16 Jul 2016 08:14 PM IST
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upnl employees end their strike.
उपनल कर्मी कई द‌िनों से आंदोलनरत थे। - फोटो : अमरउजाला

उपनल कर्मियों ने कई दिनों से चली आ रही अपनी हड़ताल खत्म कर दी। शनिवार को कई दौर की बातचीत के बाद उन्होंने हड़ताल खत्म कर धरने से उठने का फैसला किया। इसको लेकर बड़ी संख्या में कर्मियों ने विरोध भी जताया। उन्होंने कहा कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने तक आंदोलन जारी रखा जाना चाहिए। बाद में वरिष्ठ पदाधिकारियों के समझाने पर उन्होंने धरना समाप्त कर दिया।

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अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर के उपनल कर्मचारी पिछले काफी दिनों से आंदोलन कर रहे थे। बीते मंगलवार से वह कनक चौक के पास सड़क पर भूख हड़ताल और धरना-प्रदर्शन कर रहे थे।
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शुक्रवार शाम हालांकि उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया था। लेकिन ज्यादातर कर्मियों ने कैबिनेट का फैसला ना होने तक सड़क पर धरना-प्रदर्शन जारी रखने की वकालत की। इसको लेकर कर्मचारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। शनिवार को एक बार फिर इस मुद्दे पर कर्मियों के बीच नोंक-झोंक हुई।
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एक गुट था हड़ताल के पक्ष में
कर्मियों के एक गुट ने कहा कि सरकार पहले भी कई बार केवल आश्वासन देकर उन्हें टाल चुकी है। ऐसे में कैबिनेट में मुहर ना लगने तक कम से कम धरना जारी रहना चाहिए। हालांकि अध्यक्ष भावेश जगूड़ी समेत अन्य पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन पर हड़ताल खत्म करने का फैसला किया गया है।

उनके सम्मान को देखते हुए धरना खत्म करना चाहिए। अन्य पदाधिकारियों ने भी उनकी हां में हां मिलाते हुए धरना समाप्त करा दिया। इस अवसर पर विजय राम खंकरियाल, अनिल गैरोला, करन रावत, संजय चौहान, मोहन सिंह नेगी, अनसूया प्रसाद, प्रभुदयाल भंडारी, प्रवीन रमोला, ताजवीर नेगी समेत अन्य कर्मचारी शामिल रहे। 


तीन पदाधिकारी चुने
उपनलकर्मियों की मांग पर कार्रवाई के लिए गठित समिति में प्रदर्शनकारियों की ओर से भी तीन प्रतिनिधियों के नाम मांगे गए थे। शनिवार को बैठक के बाद प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष भावेश जगूड़ी, महासचिव महेश भट्ट और पूर्व सचिव कैलाश चंद्र को समिति में बतौर प्रतिनिधि भेजने का निर्णय लिया।

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