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उत्तराखंडः ऊधमसिंह नगर में बंद होगी बेमौसमी धान की खेती, पीछे हैं ये नकारात्मक परिणाम

कीर्तिराज रुमाल, अमर उजाला, रुद्रपुर Updated Fri, 20 Dec 2019 03:56 PM IST
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Unseasonal paddy cultivation will be stop in Udham Singh Nagar negative results are behind
- फोटो : फाइल फोटो

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सार

  • तराई में गिरते भूजल स्तर और कीटों की समस्या को देख कृषि विभाग ने शासन को प्रस्ताव 
  • जिले में प्रतिवर्ष करीब 40 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर होती है बेमौसमी धान की खेती 

विस्तार

उत्तराखंड के प्रमुख कृषि उत्पादक जिला ऊधमसिंह नगर में बेमौसम धान की खेती के नकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। तराई में गिरते भूजल स्तर और कीटों का जीवन चक्र बढ़ने से कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग को देखते हुए कृषि विभाग ने बेमौसम धान पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। 
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तराई में खरीफ सत्र की प्रमुख फसल धान की साल में दो बार खेती कर मुनाफा कमाने के फेर में पिछले सात-आठ सालों में तराई का भूजल स्तर करीब 70 फीट नीचे चला गया है। इसका कारण पानी का अत्यधिक दोहन और धान की दो फसलों के बीच अंतराल न होने से कीटों का जीवन चक्र टूट नहीं रहा है।
इस कारण कीटों की संख्या बढ़ने के धान की फसल में अधिक रोग लग रहे हैं। इससे धान की गुणवत्ता खराब होने के साथ ही कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग होने से खेती की लागत भी बढ़ रही है। वर्तमान में जिले की कुल एक लाख पांच हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में से करीब 40 हजार हेक्टेयर खेती बेमौसमी धान की हो रही है। 
 
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तराई का भूजल स्तर बचाना जरूरी

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