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Dehradun News: सौर स्वरोजगार योजना में 31 मार्च के बाद शुरू प्रोजेक्ट की बिजली के दाम नहीं बढ़ेंगे

Tue, 27 Oct 2026 12:50 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2026 12:50 AM IST
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Under the Solar Self-Employment Scheme, electricity charges for projects started after March 31 will not increase
देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उन सभी सोलर प्रोजेक्ट लगाने वाले विकासकों को राहत देने से मना कर दिया, जिनके प्रोजेक्ट इस साल 31 मार्च के बाद चालू हुए हैं। आयोग ने साफ कर दिया कि नियमानुसार और उपभोक्ता हित में उन्हें अब 4.64 नहीं 4.10 रुपये प्रति यूनिट ही मिलेंगे।
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उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (एमएसएसवाई) के तहत राज्य में स्वरोजगार का सपना देख रहे सौर ऊर्जा उत्पादकों को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग से बड़ा झटका लगा है। आयोग ने 31 मार्च 2026 की मियाद के बाद शुरू होने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए 4.64 प्रति यूनिट के पुराने टैरिफ को बरकरार रखने की मांग सिरे से खारिज कर दी है। आयोग ने साफ किया कि जब विकासकों ने अनुबंध की शर्तों को पढ़कर स्वेच्छा से हस्ताक्षर किए थे तो अब वे पीछे नहीं हट सकते।
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11 महीने लेट मिला एलओए, काम के लिए बचे थे मात्र 38 दिन
मामला पौड़ी गढ़वाल के ग्राम बहेड़ा (पट्टी पनेलस्यू) से जुड़ा है। यहां उपासना सक्सेना, कुलदीप सिंह और दिव्या खन्ना ने 200-200 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया था। नियम के अनुसार, तकनीकी मंजूरी (टीएफआर) मिलने के 15 दिन के भीतर अवॉर्ड लेटर (एलओए) जारी होना चाहिए था। मार्च 2025 में तकनीकी मंजूरी मिलने के बावजूद ग्रिड अपग्रेडेशन और ट्रांसफार्मर क्षमता के पेंच में यह फाइल महीनों तक यूपीसीएल और उरेडा के दफ्तरों में धूल फांकती रही। शिकायतों और सीएम पोर्टल पर गुहार के बाद आखिरकार 21 फरवरी 2026 को एलओए जारी हुआ लेकिन इसमें एक कड़ी शर्त थी कि 4.64 प्रति यूनिट का टैरिफ पाने के लिए प्लांट को 31 मार्च तक चालू (कमीशन) करना अनिवार्य था।
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नहीं चली याचिकाकर्ताओं की दलील
विकासकों ने नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर तर्क दिया कि देरी उनकी तरफ से नहीं बल्कि सरकारी महकमों की तरफ से हुई है। उरेडा ने भी आयोग के समक्ष स्वीकार किया कि कई जिलों में ऐसी दिक्कतें आई हैं और बैंकों से कर्ज अटक रहे हैं। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं को भलीभांति पता था कि एक महीने में काम पूरा होना नामुमकिन है, फिर भी उन्होंने बिना किसी विरोध या आपत्ति के 24 फरवरी 2026 को यूपीसीएल के साथ पीपीए साइन किया। आयोग ने रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक से सौर ऊर्जा संयंत्रों की लागत में काफी गिरावट आई है। वर्ष 2026-27 के लिए तय बेंचमार्क टैरिफ 4.10 प्रति यूनिट है। कई अन्य विकासक 4.10 में भी काम करने को तैयार हैं।
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