उमा भारती के सुर बदले, गंगा पर बांध नहीं रहा मुद्दा
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गंगा पर बांध बनने से धारी देवी को डूबने से बचाने के लिए प्रदेश में आंदोलन करने वाली केंद्रीय मंत्री उमा भारती के लिए अब यह मुद्दा नहीं रहा है।
उन्होंने कहा कि हम विकास विरोधी नहीं हैं। धारी देवी का मुद्दा भी पुजारी के पीछे हटने के चलते समाप्त हो गया था।
केंद्र सरकार की ओर से गंगा पर विभिन्न परियोजनाएं और जल परिवहन की योजना तैयार की जा रही हैं। इस पर पत्रकारों ने उमा भारती से सवाल किया कि उन्होंने प्रदेश में बांध का विरोध किया था और धारी देवी के स्थान परिवर्तन पर आंदोलन किया था।
बांध और विकास विरोधी नहीं हूं: उमा
उमा ने कहा कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट किया था कि वे बांध विरोधी नहीं हैं। उनके आंदोलन के दौरान बांध समर्थक और बांध विरोधी शब्द मीडिया में आते तो तब भी इस पर आपत्ति जताई थी।
उन्होंने कहा कि विकास का विरोध न पहले था और न ही अब है। विकास के साथ ही जल, जंगल जमीन का अस्तित्व बना रहे और गंगा का अखंड स्वरूप बना रहे।
उन्होंने कहा कि गंगा पर परियोजनाओं के लिए कुछ पैरामीटर बने हैं। हमारा जोर रहेगा कि उन पैरामीटर का पालन किया जाए।
मूर्ति पर पुजारी का हक
धारी देवी के सवाल पर उमा भारती ने कहा कि वहां के पुजारी ने ही हार मान ली थी। पुजारी ने मूर्ति हटा ली तो कोई क्या कर सकता था। मंदिर पर पुजारी का पहला हक है और हम पुजारी से नहीं लड़ सकते।