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तबाह हुए केदारनाथ को संवार रहीं उमा भारती
संदीप थपलियाल/ अमर उजाला, केदारनाथ
Updated Wed, 22 Oct 2014 11:15 AM IST
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केदारघाटी से विशेष अनुराग रखने वाली उमा भारती को केदारनाथ मंदिर की सुरक्षा और संवारने का मौका मिला है। इसलिए इस काम को वह स्वयं अपनी देखरेख में करवा सकती हैं। उनका केदारनाथ दौरा और अधिकारियों के साथ मीटिंग इसी प्लान का हिस्सा है।
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केदारघाटी विकास उमा के एजेंडे में पहले से
मंदिर की सुरक्षा के लिए करवाए जा रहे कामों से पारिस्थितिक तंत्र और स्थानीय पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचे, इसके लिए वह विभिन्न क्षेत्र के एक्सपर्ट को साथ में लाई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए केदारनाथ के जीर्णोद्धार करने की बात कही थी। जबकि केदारघाटी विकास उमा के एजेंडे में पहले से रहा है।
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चाहे वह सत्ता में रही हो या नहीं। वर्तमान में उनके पास नदी विकास एवं गंगा पुनरोद्धार मंत्रालय का जिम्मा है। इसलिए उनके लिए केदारनाथ और नदी संरक्षण कार्य आसान है। उमा भारती के साथ भारतीय वन्य जीव संस्थान के निदेशक डॉ. विनोद माथुर, केंद्र सरकार के उपक्रम वाटर एंड पावर कंसल्टेसी कॉओपरेशन के जीएम आरके अग्रवाल व अमित कुमार सहित अन्य एक्सपर्ट का दल है।
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जबकि बुधवार को एएसआई के उत्तराखंड हेड अतुल भार्गव, पर्यटन व सिंचाई सचिव और अन्य अधिकारियों को केदारनाथ बुलवाया गया है। मंत्री के ओएसडी बीके पांडा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि मंदिर और आसपास के निर्माण, इको टूरिज्म, भवन निर्माण ऐसे किए जाएं, जिससे इकोलॉजिकल सिस्टम में छेड़छाड़ न हो।
निर्माण कार्य और अन्य सुधार कार्य का इस क्षेत्र में पड़ने वाले असर पर एक्सपर्ट अपनी राय देंगे। एक्सपर्ट की राय, प्रदेश सरकार की योजना और स्थानीय हकू-हकूधारियों की समस्याओं के आधार पर ही योजना बनेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के तालमेल से केदारनाथ पुनर्निर्माण को केंद्र सरकार गंभीरता से ले रही है।
सरस्वती-मंदाकिनी के संगम पर बनेगा आशीर्वाद स्थल
केदारनाथ मंदिर के अंदर और परिसर में पूजा कराने वाले यात्रियों की भीड़ कम करने के लिए सरस्वती और मंदाकिनी नदी के संगम पर घाट का निर्माण किया जाएगा।
इसको केदार सुफल आशीर्वाद स्थल का नाम दिया जा रहा है। इस स्थान में तीर्थ पुरोहित अपने यजमानों की पूजा-तर्पण सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान कराएंगे। साथ ही मंदिर के पीछे स्मृति वाटिका बनाई जाएगी।
जिसमें ब्रह्मकमल उगाए जाएंगे। प्रदेश कैबिनेट ने भी श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
पिछले साल आई आपदा के बाद केदारनाथ धाम में हंस कुंड मलबे में दब गया था। इस कुंड में तीर्थयात्री अपने पितरों का तर्पण किया करते थे।
इस पूजा को उनके तीर्थ पुरोहित संपन्न कराते थे। इसके अलावा तीर्थ पुरोहित मंदिर में ही यजमानों से पूजा करने लगते हैं। यात्रियों की भीड़भाड़ होने पर इससे अव्यवस्था हो जाती है। इससे निपटने के लिए मंदिर समिति ने धाम में नदी किनारे घाट बनाने का प्लान बनाया।
मंदिर के पीछे भी जलप्रलय से सब कुछ ध्वस्त हो चुका है। कैबिनेट ने मंदिर के पीछे निर्माण कार्य न कराने का निर्णय लिया है। इस स्थान पर मंदिर समिति स्मृति वाटिका बनाएगी। आपदा में मारे गए लोगों की स्मृति में यहंा फूल उगाए जाएंगे। साथ ही भोले बाबा को चढ़ाया जाने वाला ब्रह्म कमल भी इस वाटिका की शोभा बनेगा।
घाट नाम उचित नहीं लग रहा था। इसलिए केदार सुफल आशीर्वाद स्थल नाम दिया गया। क्राउड कंट्रोल को देखते हुए यह योजना बनाई गई। जबकि स्मृति वाटिका में लगे ब्रह्मकमल को यात्री शिव को चढ़ाएंगे। इससे मंदिर समिति की आय भी बढे़गी।
- बीडी सिंह, सीईओ बीकेटीसी