बच्चे अनुशासनहीन हैं या उनके साथ हॉस्टल में हुई 'अनहोनी'
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19 जनवरी को देहरादून के एमपी स्पोर्ट्स कॉलेज से दो बॉक्सिंग छात्र घर जाने के बजाय पंजाब और राजस्थान की गलियों में घूम रहे थे।
इसी बीच छात्रों को जब कॉलेज से होने वाली रिकवरी की भनक लगी तो एक छात्र सोमवार को स्कूल पहुंच गया। वहीं दूसरे छात्र ने जल्द ही कॉलेज आने की बात कही है। प्रिंसिपल राजेश ममगाईं के मुताबिक छात्र कमल निवारी पर वर्ष 2014 से फरवरी 2016 तक चार बार गंभीर अनुशासनहीनता की कार्रवाई हो चुकी है।
इसकी जानकारी इनके परिजनों को भी दी गई, पर छात्र के रवैये में कोई सुधार नहीं आया। 19 जनवरी को कमल हॉस्टल के रूममेट और साथी सुनील पुन के साथ भाग गया। अब कमल के परिजन स्पोर्ट्स कॉलेज पर छात्रों को प्रताड़ित करने का आरोप लगा रहे हैं जो सरासर गलत है।
19 जनवरी को दोनों छात्रों के गायब होने के बाद कोच और हॉस्टल वार्डन ने दोनों के रूम मेट अभिषेक राणा, हिमांशु सोलंकी से भी पूछा पर दोनों ने अनभिज्ञता जताई। कोच ललित कुंवर ने कमल की मां को फोन किया तो उनकी मां ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं पता। प्रिंसिपल की माने तो दोनों छात्र कॉलेज और घर वालों को बगैर बताए घूमते रहे।
इस बीच बॉक्सिंग कोच ने लगातार दोनों के परिजनों से संपर्क में रहे। इसी बीच सोमवार को एक छात्र कमल तिवारी अपने भाई के साथ स्कूल पहुंचा। उसने कोच पर कई लाख रुपये लेने का आरोप लगाया। वहीं कोच ने आरोप बेबुनियाद बताते हुए कहा कि छात्र टीसी मांग रहे थे, जब परिजनों को बुलाने की बात कही तो ये दोनों छात्र चंपत हो गए। अब स्कूल प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं।
क्या कहता है स्कूल
‘दोनों छात्र पढ़ने में औसत दर्जे के हैं, पर पिछले एक दो सालों में इनकी पढ़ाई का स्तर और गिर गया है। अक्सर दोनों खोए-खोए से रहते थे क्लास में भी अधिकतर एक-दूसरे से ही बातचीत किया करते थे। कई बार टोकने पर सिर झुका लेते थे पर कोई जवाब आज नहीं दिया।’
- मीनू जुयाल, क्लास टीचर
‘बच्चा एक कोच की बजाय सभी पर गलत आरोप लगा रहा है जबकि कोच ने पहले ही परिजनों को इसकी सूचना दे दी थी। कमल यहां पांच साल से पढ़ रहा है पर उसके परिजन आज तक उसे देखने नहीं आए। अनुशासनात्मक कार्रवाई पर वह कभी किसी को भाई बनाकर कॉलेज ले आता तो कभी चाचा। जहां तक कोच के रुपये मांगने का आरोप है तो प्रवेश के समय स्टूडेंट के परिजनों से एक शपथ पत्र भरवाया जाता है, जिसमें जिक्र होता है कि अनुशासन हीनता पर कॉलेज से निकाले जाने की स्थिति आई तो सरकार की ओर से छात्र पर खर्च किए गए रुपये परिजनों को कॉलेज प्रशासन को लौटाने होंगे। एक साल में छात्र के ऊपर करीब एक से सवा लाख रुपये खर्च होते हैं। दोनों छात्रों पर अब तक 10 लाख खर्च हो चुके हैं।’
- राजेश ममगाईं, प्रधानाचार्य एमपी स्पोर्ट्स, रायपुर
अनुशासनहीन कमल की कहानी
जुलाई 2011 में यूएसनगर से ट्रायल के बाद कॉलेज में कमल तिवारी भर्ती हुआ। पहली बार निर्धारित समय से 15 दिन लेट आने पर 30-04-2014 फिर 20-03-2014 को अनुशासनहीनता का दोषी पाया गया, वहीं 29 अक्टूबर 2014 और फिर 19 जनवरी 2016 को बिना कोई सूचना के कॉलेज से गायब हो गया और अपने साथ सहपाठी सुनील पुन को भी ले गया।
कमल के नाम 2012 में एमपी में अंडर-14 में सिल्वर मेडल जीतने के बाद कोई उपलब्धि नहीं है। ऐसे में अप्रैल तक अगर उसने किसी भी नेशनल प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई नहीं किया तो मूल्यांकन में उसके कॉलेज से बाहर होने का खतरा मंडराने लगेगा।
क्या कहते हैं छात्रों के परिजन
कमल के परिजन
कॉलेज प्रशासन सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि दोनों बच्चे घर इसलिए नहीं आए क्योंकि उन्हें अनुशासनहीनता की कार्रवाई का डर था। उन्होंने बताया कि हमें टीसी दे दी जाए। हम अपना बच्चा कहीं और पढ़ाएंगे।
हमने पहले 2014 में छुट्टी पर रहने का मेडिकल दिया था। वहीं बच्चे की मां जानकी तिवारी ने आरोप लगाया कि उनके बच्चे को मारपीट कर भगाया गया था। यह पूछने पर कि वह कॉलेज से भागने के बाद वह घर क्यों नहीं आया इस पर वह चुप्पी साध गईं।
सुनील के परिजन
सुनील के भाई अनिल पुन का कहना है कि कॉलेज प्रशासन से उन्हें कोई शिकायत नहीं है। जहां तक कमल के परिजनों के आरोपों की बात है तो उनका कहना है कि सुनील के अलावा उनका एक और भाई सुशील भी स्पोर्ट्स कॉलेज का ही छात्र है उसने कभी इस तरह की शिकायत नहीं की।
अगर दोनों को कोई दिक्कत थी तो कॉलेज से भागने के बजाय इसकी शिकायत परिजनों से करनी चाहिए थी। दो दिन में भाई आ जाएगा, उसके आने पर ही हकीकत पता चलेगी।
अनसुलझे सवाल
- 27 दिन बच्चे गायब रहे और परिजनों ने दोनों को खोजने की तत्परता क्यों नहीं दिखाई?
- कमल की बातों को माने तो कॉलेज का पूरा स्टॉफ गलत है तो इसके बारे में घर में क्यों नहीं बताया?
- अगर कोच ने उन्हें पीटा या रकम मांगी थी तो दोनों ने परिजनों से शिकायत क्यों नहीं की?
- कमल कभी किसी को चाचा-भाई बनाकर लाता था तो प्रिंसिपल ने उनकी सत्यता क्यों नहीं परखी?
- कॉलेज की बाउंड्री काफी ऊंची है ऐसे में छात्र किस रास्ते से परिसर के बाहर गए, इसकी जांच क्यों नहीं हुई?
- लगातार पढ़ाई में दोनों का खराब प्रदर्शन देख क्लास टीचर ने इसकी जानकारी प्रिंसिपल को क्यों नहीं दी?