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उत्तराखंडः ट्रेन की चपेट में आने से दो हाथियों की मौत
ब्यूरो / अमर उजाला, पंतनगर
Updated Tue, 18 Apr 2017 10:27 AM IST
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- फोटो : demo pic
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उत्तराखंड के रामनगर वन प्रभाग के कोसी रेंज में करंट से हाथी की मौत को 24 घंटे भी नहीं गुजरे थे कि सोमवार को रुद्रपुर सिटी और हल्दी रोड रेलवे स्टेशन के बीच रानीखेत एक्सप्रेस की चपेट में आने से दो मादा हाथियों की जान चली गई। हादसा तड़के तीन बजे पंतनगर के हल्दी क्षेत्र में हुआ।
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वन विभाग के अधिकारियों ने पोस्टमार्टम के बाद हाथियों के शव रुद्रपुर रेंज के जंगल में दफन कर दिए। दोनों की उम्र दो से तीन साल आंकी जा रही है। वन विभाग के अनुसार ट्रेन की तेज रफ्तार हाथियों की मौत का सबब बनी है। जांच के बाद ट्रेन चालक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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जैसलमेर से काठगोदाम जा रही 15013 रानीखेत एक्सप्रेस सोमवार सुबह करीब तीन बजे हल्दी रोड स्टेशन के पिलर नंबर 5717 पर पहुंची थी। इसी दौरान हाथी के दो बच्चे ट्रेन की चपेट में आ गए। ट्रेन की टक्कर लगने से दोनों झाड़ियों में छिटककर गंभीर रूप से घायल हो गए।
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आवाज होने पर ड्राइवर ने ट्रेन रोककर इसकी सूचना हल्दी रोड रेलवे स्टेशन मास्टर एसडी यादव को दी। हादसे कारण ट्रेन बीस मिनट की देरी से हल्दी स्टेशन पहुंची। डीएफओ तराई केंद्रीय वन प्रभाग डॉ. कल्याणी, एसडीओ उमेश चंद्र तिवारी, वन दरोगा उमेश चंद्र जोशी और बीट अधिकारी गजेंद्र पाल सिंह पंतनगर विश्वविद्यालय के डॉक्टरों की टीम को लेकर मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हाथी दम तोड़ चुके थे।
वन विभाग का दावा, पटरी पर नहीं थे हाथी
वन दरोगा उमेश चंद जोशी ने कहा कि छतरपुर से लालकुआं तक रेल पटरी जंगल के बीच है। पटरी के आसपास वन्य जीव भी घूमते रहते हैं। ऐसे में ट्रेन ड्राइवरों को गति धीमी रखनी चाहिए। घटनास्थल से हल्दी स्टेशन की दूरी भी सिर्फ दो किमी है और नियमानुसार स्टेशन से दो किलोमीटर दूरी पर ट्रेन की स्पीड को कम कर दिया जाता है।
चूंकि एक हाथी के सिर और दूसरे के पेट में चोट लगी है जिससे स्पष्ट है कि हाथी पटरी पर नहीं थे बल्कि पटरी के दाएं और बाएं थे। ट्रेन की साइड लगने से उनकी मौत हुई है। ऐसे में अगर ट्रेन की रफ्तार कम होती तो हाथी सिर्फ घायल होते, लेकिन ट्रेन से टकरानेके कुछ ही देर बाद उनका मर जाना इस बात की पुष्टि करता है कि ट्रेन से उन्हें जबरदस्त टक्कर लगी है और ऐसा सिर्फ ट्रेन की तेज रफ्तार से ही हो सकता है।