फर्जी तरीके से मदरसों की मान्यता लेने वालों पर अब गिरेगी गाज, पढ़िए पूरा मामला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मानकों को धता बताकर फर्जी तरीके से मदरसों की मान्यता लेने वालों पर अब जल्द ही गाज गिर सकती है। इस मामले की अब जल्द ही उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन मौलाना जाहिद रजा रिजवी ने पत्रकारों को बताया कि इस संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही हैं।
एक-एक व्यक्ति ने फर्जी तरीके से कई-कई मदरसों की मान्यता ले रखी है। मदरसे सिर्फ कागज पर चल रहे हैं। मदरसा बोर्ड को गुमराह करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अल्पसंख्यक कल्याण भवन में चेयरमैन मौलाना रिजवी ने चेतावनी दी कि जिन मदरसों को पूर्व में शिक्षा विभाग से मान्यता मिली है और वे मदरसों की मूल शिक्षा देने के बजाए सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, वे अपने को सुधार लें।
ऐसे मदरसों ने अगर मूल मदरसा शिक्षा को नहीं अपनाया तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही मौलाना रिजवी ने बताया कि समकक्षता संबंधी शासनादेश अभी तक जारी न होने से नुकसान हो रहा है।
डीएलएड प्रशिक्षण के लिए किए गए दो हजार मदरसा शिक्षकों के आवेदन एनआईओएस ने निरस्त कर दिए हैं। उन्होंने राज्य सरकार से समकक्षता संबंधी शासनादेश जल्दी से जल्दी जारी करने की मांग की जिससे मुंशी, मौलवी और आलिम की डिग्री हासिल करने वाले छात्र-छात्राएं मुख्य धारा से जुड़ सकें और उच्च शिक्षा हासिल कर सकें ।
उन्होंने बताया कि मदरसों में पढ़ाए जाने वाले गणित, विज्ञान आदि आधुनिक विषयों में विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। छात्रों को ड्रेस, मध्यान्ह भोजन, पाठ्य पुस्तकें आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगीं।
इस संबंध में सर्व शिक्षा अभियान को पत्र भेजा जा चुका है। इसके साथ ही मुंशी, मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल डिग्री की मेरिट लिस्ट में आने वाले प्रत्येक 11 छात्रों को प्रोत्साहित किया जाएगा।