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कमान संभालने के बाद नए सीएम ने जाना कर्ज का मर्ज

Sun, 19 Mar 2017 12:39 PM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 19 Mar 2017 12:39 PM IST
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trivendra rawat know about uttarakhand debt
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भाजपा सरकार के विजन डाक्यूमेंट को जमीन पर उतारने की राह में सबसे बड़ी चुनौती तंगहाली बनेगी। सत्ता की कमान संभालने के फौरन बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके मंत्री सचिवालय पहुंचे तो सबसे पहले उन्होंने प्रदेश के माली हालत का सच जाना।

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सूबे की नौकरशाही ने कर्ज के मर्ज का सच दिखाने का इंतजाम कर रखा था। राज्य पर अब तक 430 अरब रुपये से ज्यादा का कर्ज हो चुका है और लगातार बढ़ते खर्चों का बोझ वहन करने के लिए सरकार को हर साल हजारों करोड़ रुपये का ऋण लेना पड़ता है।
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परेड ग्राउंड में शपथग्रहण समारोह के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके मंत्रिमंडल सहयोगी शाम करीब साढ़े चार बजे राज्य सचिवालय पहुंचे। वे कैबिनेट बैठक के लिए पहुंचे थे। लेकिन, बैठक शुरू होने से पहले उन्होंने प्रदेश के हालातों का सच जानना चाहा। मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने पहले से ही इसके लिए होमवर्क किया था। विजन डाक्यूमेंट के आधार पर सभी विभागों की स्टेट्स रिपोर्ट उन्होंने पहले ही जुटा ली थी।
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मगर नई सरकार की दिलचस्पी राज्य की माली हैसियत को जानने में ज्यादा थी। इसलिए शुरुआत इसी मसले से हुई। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन से प्रदेश की आमदनी और खर्च का बेहद सधे अंदाज में ब्योरा रखा। उन्होंने बताया कि प्रदेश की आय के संसाधन बहुत सीमित हैं, मगर खर्च और उधारी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। सरकार को स्टैंप, वैट और आबकारी से ही मुख्य रूप से आमदनी होती है और इनके अलावा आय का कोई बड़ा श्रोत नहीं है। आय के सीमित श्रोत होने की वजह से राज्य पर खर्च और उधारी का दबाव कम नहीं हो रहा है।

सूत्रों की मानें तो इस दौरान उन्होंने उन संसाधनों का भी जिक्र किया जिन पर फोकस करके राज्य की माली हालत को सुधारा जा सकता है। उनका सुझाव था कि इसके लिए खनन, विद्युत योजनाएं, वन उपज और परिवहन सेवाओं के क्षेत्र में अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि उपलब्ध श्रोतों से जितनी हो सकती थी, उतनी आय अर्जित कर ली गई है।


संसाधनों पर होगी कैबिनेट बैठक
राज्य की माली हालत का सच जानने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केवल वित्तीय स्थिति को लेकर ही एक कैबिनेट बैठक करने का निर्णय लिया। इस बैठक में उन्होंने वित्त विभाग को आय के संसाधन बढ़ाने की संभावना वाले क्षेत्रों के बारे में प्रस्ताव तैयार करने को कहा।  

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