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यहां जब मन किया, बदल दिए जिलाधिकारी

Fri, 28 Apr 2017 02:32 PM IST
अमरनाथ/ अमर उजाला, हल्द्वानी
अमरनाथ/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Fri, 28 Apr 2017 02:32 PM IST
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transfer of dm on government hand
Transfer - फोटो : demo pic

कुमाऊं के छह जिलों में जिलाधिकारियों के तबादलों का रिकार्ड बता रहा है कि जिलाधिकारियों को इधर से उधर करना सत्ता पक्ष के लिए शगल बनता जा रहा है।

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हाल यह है कि 17 साल में पिथौरागढ़ में 17 जिलाधिकारी बदल दिए गए। मतलब हर साल नया जिलाधिकारी यहां पहुंच रहा है। इसके उलट, नैनीताल से विदा हुए दीपक रावत ने 30 माह नैनीताल डीएम बने रहने का रिकार्ड कायम किया है।
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नैनीताल जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें से एक हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार है और कांग्रेस-भाजपा के बीच संघर्ष का गढ़ भी। नैनीताल पर कई अधिकारियों की निगाह रहती है। नैनीताल में हाइकोर्ट के अलावा राजभवन भी है। ऐसे में नैनीताल में पोस्टिंग पाने के लिए भी लॉबिंग होती रहती है।
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इसके लिए कई नौकरशाह राजनीतिक आकाओं की परिक्रमा भी करते हैं। अब राजनीतिक संरक्षण कहें या उनकी कार्यकुशलता, कारण जो भी हो लेकिन  नैनीताल जिले में तैनाती पा चुके 14 जिलाधिकारियों में से दीपक कुमार अब सबसे अधिक समय तक इस जिले में बने रहने का रिकार्ड अपने नाम कर चुके हैं।

 राज्य गठन के समय नैनीताल जिले में आराधना शुक्ला और बाद में अमित कुमार नेगी उन जिलाधिकारियों में शामिल हैं, जिनका कार्यकाल केवल छह माह का रहा है। शासन में जिम्मेदारी संभाल रहे शैलेश बगोली और राकेश कुमार ने भी लंबी पारी खेली। दोनों यहां 25-25 महीने तक जिलाधिकारी पद पर तैनात रहे।

बता दें कि 1992 में नैनीताल के तत्कालीन डीएम सूर्य प्रताप सिंह जनसरोकार, कड़क प्रशासन, अतिक्रमण हटाने को लेकर त्वरित निर्णय के चलते लोकप्रिय हुए थे। उनका तबादला रोकने के लिए लोगों ने लगातार 15 दिन तक धरने-प्रदर्शन किए थे। हालांकि अपने कार्यकाल में उन्होंने 50 से अधिक तबादले झेले।

पिथौरागढ़ जिला आपदा और भौगोलिक दृष्टि से सबसे अधिक विकट है। हल्द्वानी से पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय 230 किमी तो देहरादून से 560 किमी दूर है। इस कारण से भी कई डीएम को यह पर्वतीय जिला रास नहीं आया। अभी तक कोई डीएम न तो तीन साल कार्यकाल पूरा कर सका और न ही नियोजित विकास की बात सोच सका। हालांकि एचसी सेमवाल दो बार पिथौरागढ़ के डीएम रह चुके हैं। उधर, अल्मोड़ा के डीएम सविन बंसल एक मंत्री से यहां तक कह चुके हैं, उनका तबादला मंजूर है, लेकिन जनहित में लिए गए प्रशासनिक फैसले वापस लेना मंजूर नहीं है। बागेश्वर के डीएम मंगेश घिल्डियाल जनसरोकार से जुड़कर सेवाएं दे रहे हैं।


ऊधमसिंह नगर जिले में नौ विधानसभा क्षेत्र हैं। कुमाऊं के सबसे बड़े जिले में अब तक 16 डीएम बदल चुके हैं। पिछले साल डीएम अक्षत गुप्ता के असामयिक निधन के बाद भी राजनीतिक दबाव की बात सामने आई थी। इस जिले में सुंदर लाल डीएम थे, जो करीब चार साल तक पद पर बने रहे। उनके समय में ही सिडकुल की स्थापना हुई थी।
   
जिला -     मौजूदा डीएम         - कब से
पिथौरागढ़- सी. रविशंकर (18वें) - 27 मार्च, 2017 से
ऊधमसिंह नगर- डा. नीरज खैरवाल (17वें) - 24 मार्च, 2017 से
चंपावत- डा. अहमद इकबाल (17 वें)- 01 जून, 2016 से
नैनीताल- दीपक रावत (14वें) - 10 नवंबर , 2014 से 27 अप्रैल, 2017
बागेश्वर-  मंगेश घिल्डियाल (15वें) 20 दिसंबर, 2016 से
अल्मोड़ा- सविन बंसल (13वें) - 13 अक्तूबर, 2015 से 

अब डीएम के तबादलों में ट्रांसफर पॉलिसी का पालन नहीं होता। एक डीएम का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन नियोजित विकास के लिए कम से कम उसे दो साल एक जगह पर रहने देना चाहिए। काम के आकलन के आधार पर ही ट्रांसफर होने चाहिए। सरकार किसी पार्टी की भी हो नौकरशाह को न्यूट्रल रहना चाहिए।
- सूर्य प्रताप सिंह, पूर्व डीएम, नैनीताल

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