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पर्यटन स्थल लाखामंडल में बढ़ेंगी जन सुविधाएं
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लाखामंडल स्थित पौराणिक मंदिर।
- फोटो : VIKAS NAGAR
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राज्य सरकार ने लाखामंडल को नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद तेज कर दी है। क्षेत्र में सुविधाएं विकसित करने के लिए पहली किश्त के रूप में 50 लाख रुपये का बजट जारी किया गया है। इस बजट से क्षेत्र में होटल, पार्किंग, शौचालय, लाइटिंग, सड़क समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बीते साल मई 2018 में राज्य सरकार ने नई टिहरी में आयोजित कैबिनेट बैठक में लाखामंडल को नए पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी किशन रावत ने बताया कि लाखामंडल का पौराणिक महत्व रहा है। हर साल यहां सैकड़ों सैलानी मंदिर में देव दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में यहां पर सुविधाओं का तेजी से विकास हो सके, इसके लिए शासन स्तर पर मंथन जारी है। फिलहाल क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रथम चरण में 50 लाख रुपये का बजट जारी हुआ है। जल्द ही निविदाएं आमंत्रित कर विकास कार्य शुरू करा दिए जाएंगे।
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लोगों को मिलेगा रोजगार
पौराणिक नगरी लाखामंडल के पर्यटन सर्किट से जुड़ने के बाद यहां रहने वाले लोगों को रोजगार भी मुहैया हो सकेगा। रोजाना क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैलानियों के आने के बाद भी स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए विकासनगर और देहरादून की दौड़ लगानी पड़ती है। इसका कारण यहां पर पर्यटकों के अनुकूल सुविधाओं का न होना है। ऐसे में सरकार का फोकस क्षेत्र में सुविधाओं के विकास के साथ ही आसपास के गांव में रहने वाले लोगों को पर्यटन व्यवसाय से जोड़ रोजगार उपलब्ध कराना भी है।
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लाखामंडल में मिली हैं कई गुफाएं और प्राचीन अवशेष
देहरादून से 128 किमी की दूर यमुना नदी के तट पर स्थित लाखमंडल कई गुफाओं और भगवान शिव के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरा हुआ है। यहां खुदाई में विभिन्न आकार और ऐतिहासिक काल के शिवलिंग मिले हैं। लाखामंडल मंदिर को उत्तर भारतीय वास्तुकला शैली में बनाया गया है, मंदिर के अंदर पार्वती के पैरों के निशान एक चट्टान पर देखे जा सकते हैं, जो इस मंदिर की विशिष्टता है। माना जाता है कि मंदिर का निर्माण युधिष्ठिर ने किया था। मान्यता यह भी है कि इस जगह पर पांडवों को मारने के लिए दुर्योधन ने लाक्षागृह बनवाया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण 8वीं सदी में कई पत्थर छवियों के साथ किया गया है।
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बीते साल मई 2018 में राज्य सरकार ने नई टिहरी में आयोजित कैबिनेट बैठक में लाखामंडल को नए पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी किशन रावत ने बताया कि लाखामंडल का पौराणिक महत्व रहा है। हर साल यहां सैकड़ों सैलानी मंदिर में देव दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में यहां पर सुविधाओं का तेजी से विकास हो सके, इसके लिए शासन स्तर पर मंथन जारी है। फिलहाल क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रथम चरण में 50 लाख रुपये का बजट जारी हुआ है। जल्द ही निविदाएं आमंत्रित कर विकास कार्य शुरू करा दिए जाएंगे।
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लोगों को मिलेगा रोजगार
पौराणिक नगरी लाखामंडल के पर्यटन सर्किट से जुड़ने के बाद यहां रहने वाले लोगों को रोजगार भी मुहैया हो सकेगा। रोजाना क्षेत्र में बड़ी संख्या में सैलानियों के आने के बाद भी स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए विकासनगर और देहरादून की दौड़ लगानी पड़ती है। इसका कारण यहां पर पर्यटकों के अनुकूल सुविधाओं का न होना है। ऐसे में सरकार का फोकस क्षेत्र में सुविधाओं के विकास के साथ ही आसपास के गांव में रहने वाले लोगों को पर्यटन व्यवसाय से जोड़ रोजगार उपलब्ध कराना भी है।
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लाखामंडल में मिली हैं कई गुफाएं और प्राचीन अवशेष
देहरादून से 128 किमी की दूर यमुना नदी के तट पर स्थित लाखमंडल कई गुफाओं और भगवान शिव के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरा हुआ है। यहां खुदाई में विभिन्न आकार और ऐतिहासिक काल के शिवलिंग मिले हैं। लाखामंडल मंदिर को उत्तर भारतीय वास्तुकला शैली में बनाया गया है, मंदिर के अंदर पार्वती के पैरों के निशान एक चट्टान पर देखे जा सकते हैं, जो इस मंदिर की विशिष्टता है। माना जाता है कि मंदिर का निर्माण युधिष्ठिर ने किया था। मान्यता यह भी है कि इस जगह पर पांडवों को मारने के लिए दुर्योधन ने लाक्षागृह बनवाया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण 8वीं सदी में कई पत्थर छवियों के साथ किया गया है।