टोक्यो ओलंपिक: हॉकी के लिए संजीवनी साबित होगी जीत, पूर्व ओलंपियन बोले-बेटियों की जीत से दिल बाग-बाग
इन खिलाड़ियों का कहना है कि पुरुष और महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक में जो खेल दिखाया है, उसने हॉकी के लिए संजीवनी का काम किया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
टोक्यो ओलंपिक के र्क्वाटर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को 1-0 से शिकस्त देने वाली भारतीय महिला टीम के प्रदर्शन पर पूरे देश में खुशी है। पर सबसे ज्यादा खुशी हॉकी का सुनहरा वक्त देखने वाले हॉकी के प्रशंसकों और खिलाड़ियों में हैं।
वे भारतीय टीम की जीत से उत्साहित हैं। इन खिलाड़ियों का कहना है कि पुरुष और महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक में जो खेल दिखाया है, उसने हॉकी के लिए संजीवनी का काम किया है। उत्तराखंड में खिलाड़ियों के भविष्य पर इन खिलाड़ियों का कहना है कि इसके लिए ईमानदारी से काम किए जाने की जरूरत है।
ओलंपियन और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बोले
बेटियों ने पहला मैच हारने के बाद बेहतरीन खेल दिखाया है और पदक की उम्मीदें जगा दीं हैं। जीत की नायिका गोलकीपर सविता पुनिया रहीं, जिसने कुल नौ बेहतरीन बचाव किए। इस जीत से निश्चित ही भारत में हॉकी के प्रति लोगों में क्रेज बढ़ेगा। बस बच्चों के भीतर जगे इस क्रेज को अमलीजामा पहनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है। एक समय स्कूल स्तर पर हॉकी समेत कई खेल होते थे, लेकिन वर्तमान समय में एक दो स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो खेल के नाम पर बस औपचारिकता होती है।
- सैययद अली, नैनीताल ओलंपिक खिलाड़ी 1976
ओलंपिक में महिला और पुरुष टीम ने हॉकी में बेहतरीन प्रदर्शन करके पुराने दौर की याद दिला दी और स्वर्ण पदक की उम्मीद भी जगा दी है। 1980 में भारतीय हॉकी टीम ने मास्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था। प्रदेश में हॉकी के भविष्य की बात की जाए तो इसके लिए जमीनी स्तर पर काम किए जाने की जरूरत है, क्योंकि घर के अंदर खेलकर कोई आगे नहीं बढ़ सकता। सुविधाओं के नाम पर देहरादून में ही एस्ट्रो टर्फ है। जब तक प्रदेश और खेल संघ के स्तर से ईमानदारी से कोशिश नहीं होगी, खिलाड़ी कैसे निकलेंगे।
- राजेंद्र रावत, नैनीताल पूर्व ओलंपियन (1988 सियोल ओलंपिक)
आज और कल का ऐतिहासिक दिन रहा है और यह हमारे लिए गर्व की बात है। दोनों ही टीमों ने वर्ल्ड क्लास हॉकी खेली हैं। इस जीत से निश्चित ही भारतीय हॉकी को संजीवनी मिलेगी। जमीनी स्तर कुछ काम हुआ है और बहुत कुछ होना बाकी है। हॉकी खेलने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। स्कूल लेवल और जूनियर पर लेवल पर हॉकी के टूर्नामेंट होने चाहिए। इन खेलों के जरिये ही हमें भविष्य की वदंना कटारिया, मनप्रीत जैसे खिलाड़ी मिलेंगे। सरकार के साथ खेल संघ भी इस विषय पर गंभीरता से सोचें
-हरीश भाकुनी, हल्द्वानी, पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
ओलंपिक में जो खिलाड़ी गए हैं, वे अपनी मेहनत से आगे बढ़े और अपना सौ फीसदी दे भी रहे हैं। एक कड़वी हकीकत यह है कि अभिभावकों को हॉकी, फुटबाल और बॉक्सिंग जैसे खेलों में बच्चों का भविष्य नजर नहीं आता है और इन खेलों में क्रिकेट की अपेक्षा एक्सपोजर भी कम है। पहले तो खेल प्रशंसकों और विज्ञापन दाताओं को इन खेलों के लिए भी वैसा ही प्यार दिखाना होगा, जैसा क्रिकेट के लिए दर्शाते हैं। सरकार को खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर करने वालों के लिए नौकरी की व्यवस्था करनी होगी।
- मुकुल शाह, नैनीताल, पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
आज तो बेटियों ने कमाल करके दिखा दिया है। मैदान पर बेटियों को खुशी मनाते देखकर लग रहा था कि भागकर उनके पास जाऊं और उन्हें गले लगाकर इस जीत की बधाई दूं। ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को 1-0 से पटखनी देकर बेटियों ने बता दिया कि हम किसी से कम नहीं। हमारे समय में तो अभिभावक खेलने के लिए मना करते थे। उस दौर में पिथौरागढ़ से निकलकर पिता जी के सपोर्ट से मैं आगे बढ़ी और प्री ओलंपिक तक पहुंची। इसके अलावा टेस्ट सीरीज भी खेली।
-हरप्रिया रौतेला, पिथौरागढ़, पूर्व अतंरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
प्रदेश में खेल सुविधाएं बढ़ाई जाएं
भारत में क्रिकेट को गांव-गांव तक पहुंचाने का जो काम 1983 के वर्ल्ड कप में कपिल देव ने किया था वही काम हॉकी के लिए करने का मौका रानीरामपाल और मनप्रीत की टीम के पास है। दोनों टीमें फाइनल में पहुंचने और जीतने के कामयाब होती हैं तो भारत में हॉकी की दशा और दिशा दोनों ही बदल जाएंगी। साथ ही प्रदेश स्तर पर भी गांव-गांव तक प्रदेश सरकार और खेल संघों को खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं पहुंचानी चाहिए।
देश और प्रदेश में खेलों के लिए बजट बढ़ाने की जरूरत है। राज्य ओलंपिक संघ के सचिव डीके सिंह का भी कहना है कि प्रदेश के बच्चों में काफी क्षमता है लेकिन बजट और सुविधाओं के अभाव में हॉकी समेत अन्य खेलों में प्रतिभाएं आगे नहीं आ पाती हैं। मशहूर उद्घोषक और राज्य गीत के रचयिता हेमंत बिष्ट भी प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए नियमित अंतराल पर बड़े टूर्नामेंट के आयोजन और खिलाड़ियों के लिए खेल सुविधाओं को बढ़ाने की वकालत करते हैं।
भारतीय हॉकी टीम के दो खिलाड़ियों का नैनीताल कनेक्शन
भारतीय हॉकी टीम उपकप्तान सुरेंद्र कुमार और सुमित वाल्मीकि का नैनीताल कनेक्शन भी है। नैनीताल में होने वाले डीएसए कप, जिसका अमर उजाला मीडिया पार्टनर है। हॉकी के प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में दोनों खिलाड़ी हिस्सा ले चुके हैं। उद्घोषक और राज्य गीत के रचयिता हेमंत बिष्ट ने बताया कि दोनों ही खिलाड़ी यहां की खूबसूरती और हॉकी के प्रति लोगों का क्रेज देखकर काफी खुश थे और भविष्य में भी यहां आने की बात कही थी। पर पिछले दो वर्षों के दौरान कोरोना की वजह से हॉकी प्रतियोगिता नहीं होने से दोनों ही खिलाड़ी यहां नहीं आ सके।