बदले की भावना से भी हो रही बाघों की हत्या, वन संरक्षक ने जांच रिपोर्ट में जताई आशंका
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हरिद्वार वन प्रभाग के श्यामपुर आरक्षित वन क्षेत्र में 10 मई 2018 को हुई दो साल की बाघिन की मौत प्रतिशोधात्मक हत्या के मामले की ओर इशारा कर रही है। इस मामले की जांच कर रहे अनुसंधान वृत्त हल्द्वानी के वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी की रिपोर्ट में यही आशंका व्यक्त की गई है। संजीव ने ऐसे मामलों के बढ़ने की आशंका जताते हुए बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है।
संजीव की अंतरिम रिपोर्ट के मुताबिक श्यामपुर रेंज के कक्ष संख्या नौ में दस मई को मृत मिली बाघिन की मौत प्राकृतिक कारण या वन्य जीवों के आपसी संघर्ष में नहीं हुई। इस बाघिन की मौत की वजह सिर पर भारी हथियार से चौट पाई गई। बाघिन के सभी अंग सुरक्षित पाए गए और ऐसे में शिकार या अंगों की तस्करी के लिए हत्या को वजह नहीं माना जा सकता है।
रपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हरिद्वार वन प्रभाग की चिड़ियापुर रेंज में फरवरी 2017 को हुई बाघ की मौत के पीछे भी प्रतिशोधात्मक हत्या को वजह माना गया था। रिपोर्ट के मुताबिक मानव और पशुओं को नुकसान पहुंचाने की वजह से बाघों के खिलाफ प्रभावित क्षेत्र के लोगों में गुस्सा रहता है। ऐसे में बदले की भावना से बाघों की हत्या से भी इनकार नहीं किया सकता है।
ये दिए सुझाव.....
1. बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को अधिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। आरक्षित वन क्षेत्र से इतर वन क्षेत्रों में संसाधन बढ़ाए जाने की जरूरत है।
2. वन विभाग के मुखबिर तंत्र को मजबूत किया जाए।
3. प्रभागीय वन अधिकारियों को इंडियन टेलीग्राफिक एक्ट 1885 के तहत अधिकार प्रदान किए जाएं। इस एक्ट के तहत टेलीग्राम अधिकारियों को किसी संदेश या संदेशवाहक को जब्त करने, पूछताछ करने का अधिकार होता है।
4. प्रदेश में वन रक्षकों की संख्या बेहद कम है। इनकी संख्या बढ़ाई जाए और वन कर्मियों को अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जाएं
5. प्रभावित व्यक्तियों को तुरंत मुआवजा देने की व्यवस्था की जाए।
...हाईकोर्ट भी जता चुका है चिंता
बाघों की मौत पर उत्तराखंड हाईकोर्ट भी चिंता जता चुका है। हाईकोर्ट ने तो वन विभाग को यहां तक कहा था कि यहां अगर बाघों की सुरक्षा नहीं हो सकती है तो सारे बाघों को गुजरात के राष्ट्रीय पार्क में भेज दिया जाए। संजीव ने यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही तैयार की थी। संजीव की ओर से अब इस मामले में एक नियमित जांच अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव भी दिया गया है।