फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Tigers kill because of Revenge shocking report

बदले की भावना से भी हो रही बाघों की हत्या, वन संरक्षक ने जांच रिपोर्ट में जताई आशंका

Mon, 05 Nov 2018 08:46 AM IST
न्यूज डेस्ट/अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्ट/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Mon, 05 Nov 2018 08:46 AM IST
विज्ञापन
Tigers kill because of Revenge shocking report
tiger

हरिद्वार वन प्रभाग के श्यामपुर आरक्षित वन क्षेत्र में 10 मई 2018 को हुई दो साल की बाघिन की मौत प्रतिशोधात्मक हत्या के मामले की ओर इशारा कर रही है। इस मामले की जांच कर रहे अनुसंधान वृत्त हल्द्वानी के वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी की रिपोर्ट में यही आशंका व्यक्त की गई है। संजीव ने ऐसे मामलों के बढ़ने की आशंका जताते हुए बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। 

विज्ञापन


संजीव की अंतरिम रिपोर्ट के मुताबिक श्यामपुर रेंज के कक्ष संख्या नौ में दस मई को मृत मिली बाघिन की मौत प्राकृतिक कारण या वन्य जीवों के आपसी संघर्ष में नहीं हुई। इस बाघिन की मौत की वजह सिर पर भारी हथियार से चौट पाई गई। बाघिन के सभी अंग सुरक्षित पाए गए और ऐसे में शिकार या अंगों की तस्करी के लिए हत्या को वजह नहीं माना जा सकता है।
विज्ञापन


रपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हरिद्वार वन प्रभाग की चिड़ियापुर रेंज में फरवरी 2017 को हुई बाघ की मौत के पीछे भी प्रतिशोधात्मक हत्या को वजह माना गया था। रिपोर्ट के मुताबिक मानव और पशुओं को नुकसान पहुंचाने की वजह से बाघों के खिलाफ प्रभावित क्षेत्र के लोगों में गुस्सा रहता है। ऐसे में बदले की भावना से  बाघों की हत्या से भी इनकार नहीं किया सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

ये दिए सुझाव.....

1. बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को अधिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। आरक्षित वन क्षेत्र से इतर वन क्षेत्रों में संसाधन बढ़ाए जाने की जरूरत है।
2. वन विभाग के मुखबिर तंत्र को मजबूत किया जाए। 
3. प्रभागीय वन अधिकारियों को इंडियन टेलीग्राफिक एक्ट 1885 के तहत अधिकार प्रदान किए जाएं। इस एक्ट के तहत टेलीग्राम अधिकारियों को किसी संदेश या संदेशवाहक को जब्त करने, पूछताछ करने का अधिकार होता है।
4. प्रदेश में वन रक्षकों की संख्या बेहद कम है। इनकी संख्या बढ़ाई जाए और वन कर्मियों को अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जाएं
5. प्रभावित व्यक्तियों को तुरंत मुआवजा देने की व्यवस्था की जाए। 

...हाईकोर्ट भी जता चुका है चिंता
 बाघों की मौत पर उत्तराखंड हाईकोर्ट भी चिंता जता चुका है। हाईकोर्ट ने तो वन विभाग को यहां तक कहा था कि यहां अगर बाघों की सुरक्षा नहीं हो सकती है तो सारे बाघों को गुजरात के राष्ट्रीय पार्क में भेज दिया जाए। संजीव ने यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही तैयार की थी। संजीव की ओर से अब इस मामले में एक नियमित जांच अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव भी दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed