नेशनल पार्क में बढ़ेगी ‘जंगल के राजा’ की दहाड़
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कार्बेट के बाद उत्तराखंड में राजाजी नेशनल पार्क में जंगल के राजा की दहाड़ें बढ़ने वाली हैं। पार्क के टाइगर रिजर्व घोषित होने के साथ ही पार्क प्रशासन और वन विभाग के स्तर पर बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
हालांकि, इससे पहले भारतीय वन्यजीव संस्थान और नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) से दिशानिर्देश मिलने का इंतजार है। प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) उत्तराखंड अनिल कुमार दत्त बताते हैं कि राजाजी टाइगर रिजर्व में इस समय 25 के करीब बाघ हैं।
इनकी संख्या बढ़ाने के लिए बाघों का ट्रांसलोकेशन किया जाएगा। यानी बाघों को रिजर्व के अलग-अलग क्षेत्रों में ले जाकर छोड़ा जाएगा। पार्क में पहले से मौजूद मादा बाघों के लिए कार्बेट पार्क से नर बाघ लाए जाएंगे।
पार्क में वन्यजीव
जीव - संख्या
हाथी - 500 से अधिक
बाघ - 25
गुलदार - 250
पक्षी - 400 प्रजातियां
ये भी हैं पार्क में
हिरन, सांभर, बार्किंग डियर, घुरड़, साही, चीतल, पेंगोलिन समेत कई अन्य छोटे-बड़े वन्यजीव राजाजी नेशनल पार्क की जैव विविधता को बढ़ाते हैं। पार्क में र्कई प्रजातियों के सांप, अजगर भी हैं। पार्क में हिमालयन काले भालू के अलावा पीली गर्दन वाले भालू भी मिलते हैं।
इनके अलावा स्ट्रिप्ड हाईना, सियार, नीलगाय, जंगली सुअर भी यहां बड़ी संख्या में हैं। पक्षियों की बात करें तो यहां कठफोड़वा की 11 प्रजातियां, हार्न बिल की तीन प्रजातियों समेत कई दुर्र्लभ और प्रवासी पक्षी नजर आते हैं।
पेड़ों की भी कई प्रजातियां
राजाजी नेशनल पार्क में पेड़ों की भी कई प्रजातियां हैं। साल के घने जंगलों के अलावा पार्क क्षेत्र में अमलतास, पलाश, कचनार, बेल, सेमल, चिल्ला, अर्जुन, खैर, बनास, संदन के पेड़ शाकाहारी वन्यजीवों के लिए आहार उपलब्ध कराते हैं।
पार्क की सीमाएं
820.20 वर्ग किलोमीटर में विस्तृत राजाजी नेशनल पार्क प्रदेश के तीन जिलों में फैला है। गंगा नदी के दोनों किनारों पर नेशनल पार्क की सीमाएं पौड़ी जिले में लक्ष्मणझूला और लैंसडौन वन प्रभाग, हरिद्वार में चीला, मोतीचूर रेंज और देहरादून जिले में शिवालिक रेंज तक विस्तृत हैं।
बाघों की संख्या में उत्तराखंड दूसरे स्थान पर
अब तक एकमात्र कार्बेट टाइगर रिजर्व होने के बावजूद उत्तराखंड बाघों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2014 में भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा की गई गणना के अनुसार प्रदेश में बाघों की संख्या 340 है। जबकि 6 टाइगर रिजर्र्व वाला कर्नाटक 406 बाघों की संख्या के साथ देश में पहले स्थान पर है।
वहीं 6 टाइगर रिजर्व वाला मध्य प्रदेश 306 बाघों के साथ तीसरे स्थान पर है। राजाजी पार्क की निदेशक नीना ग्रेवाल कहती हैं कि राजाजी को भी टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद बाघों की संख्या में बढ़ोतरी होना तय है।