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तिब्बती महिलाओं यूएन से चीन पर दबाव बनाने की मांग
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तिब्बत एसोसिएशन की ओर से सहस्त्रधारा रोड स्थित तिब्बतन कालोनी में एसोसिएशन की 61वीं साल गिराह पर ?
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61वें तिब्बत राष्ट्रीय विद्रोह दिवस के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार को तिब्बती महिला एसोसिएशन की बैठक हुई। इस दौरान महिलाओं ने कहा कि तिब्बत छह दशकों से चीन की दमनकारी नीतियों से परेशान है। ऐसे में वे संयुक्त राष्ट्र से मांग करती हैं कि चीन पर दबाव बनाकर दलाई लामा के प्रतिनिधियों से वार्ता कराई जाए।
महिलाओं ने राष्ट्रीय विद्रोह दिवस के बारे में बताया कि आज ही के दिन वर्ष 1959 में चीन ने तिब्बत पर आक्रमण किया था। वहां निर्दोष महिलाओं, बच्चों और साधु सन्यासियों को मौत के घाट उतारा गया। चीन की सेना ने तीन दशकों तक तिब्बत पर बहुत अत्याचार किए। यह अत्याचार आज भी जारी हैं। इसी के विरोध में तिब्बत हर साल राष्ट्रीय विद्रोह दिवस मनाता है। चीन की इन दमनकारी नीतियों के खिलाफ अब तक सैकड़ों तिब्बती महिलाएं, युवा और बुजुर्ग आत्मदाह कर चुके हैं।
महिला एसोसिएशन ने कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र से मांग करती हैं कि चीन पर इस बात का दबाव डाला जाए कि वहां से पंचेन लामा और अन्य राजनीतिक कैदियों को मुक्त किया जाए। ये नेता कई सालों से अज्ञातवास में रह रहे हैं।
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महिलाओं ने राष्ट्रीय विद्रोह दिवस के बारे में बताया कि आज ही के दिन वर्ष 1959 में चीन ने तिब्बत पर आक्रमण किया था। वहां निर्दोष महिलाओं, बच्चों और साधु सन्यासियों को मौत के घाट उतारा गया। चीन की सेना ने तीन दशकों तक तिब्बत पर बहुत अत्याचार किए। यह अत्याचार आज भी जारी हैं। इसी के विरोध में तिब्बत हर साल राष्ट्रीय विद्रोह दिवस मनाता है। चीन की इन दमनकारी नीतियों के खिलाफ अब तक सैकड़ों तिब्बती महिलाएं, युवा और बुजुर्ग आत्मदाह कर चुके हैं।
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महिला एसोसिएशन ने कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र से मांग करती हैं कि चीन पर इस बात का दबाव डाला जाए कि वहां से पंचेन लामा और अन्य राजनीतिक कैदियों को मुक्त किया जाए। ये नेता कई सालों से अज्ञातवास में रह रहे हैं।
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