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डॉक्टर बनने पर पांच नहीं तीन साल चढ़ेंगे पहाड़

Wed, 10 Dec 2014 09:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 10 Dec 2014 09:15 AM IST
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three year bond for medical student instead of five year.

राजकीय मेडिकल कॉलेजों में रियायती फीस पर एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए दुर्गम क्षेत्र में नौकरी की अनिवार्यता पांच से घटाकर तीन वर्ष कर दी है।

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श्रीनगर और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में इस सत्र से प्रवेश लेने वाले छात्रों के स्वास्थ्य विभाग के साथ भरे जाने वाले बांड में तीन वर्ष की सेवाओं की अनिवार्यता रहेगी। दरअसल पुराने बांड में कई तकनीकी और कानूनी खामियां रही हैं, जिससे छात्र फीस में छूट लेने के बावजूद सेवाएं नहीं दे रहे हैं।
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दोनों मेडिकल कॉलेजों में बांड भरकर एमबीबीएस पूरा करने वाले 60 फीसदी छात्र या तो बांड का उल्लंघन कर हर्जाना भर चुके हैं या फिर कानूनी कार्यवाही की जद में हैं। निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ.आरपी भट्ट ने बताया कि बांड की शर्तों को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए यह बदलाव किया है, जिससे अधिक से अधिक डाक्टर दुर्गम में सेवाएं दे सकें।

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श्रीनगर मेडिकल कॉलेज 76 विद्यार्थियों ने भरे बांड

three year bond for medical student instead of five year.

श्रीनगर। मेडिकल कालेज से पास आउट छात्र-छात्राओं के लिए उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित सरकारी अस्पतालों में सेवा अवधि घटाने का असर दिखने लगा है। मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं अब बिना किसी दबाव के पहाड़ी क्षेत्रों में सेवा का बांड भर रहे हैं।

एमबीबीएस प्रथम वर्ष (2014-15) में अध्ययनरत राज्य कोटे के 85 छात्र-छात्राओं में से 76 छात्र-छात्राओं ने इस बांड पर हस्ताक्षर कर लिए हैं।

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी होने से स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया था कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं जब एमबीबीएस पूरा कर लेंगे, तब उनको पहले पांच साल संविदा पर दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देनी होंगी।

इसके लिए सरकार ने एमबीबीएस की फीस मात्र 15 हजार रुपये प्रतिवर्ष रखी ताकि छात्र-छात्राओं पर आर्थिक बोझ कम पडे़ और वंचित क्षेत्रों को डॉक्टर्स मिल सकें।

नए नियम में यह हैं शर्तें

three year bond for medical student instead of five year.

मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में वर्ष 2008 से प्रथम बैच शुरू होने के बाद से छात्र-छात्राओं से बांड भरवाना मुश्किल काम रहा। अब दुर्गम क्षेत्र में सेवा देने की अवधि पांच से घटाकर तीन साल कर दी गई है।

यह है नई शर्ते
23 मई 2013 को जारी जीओ के अनुसार,  राजकीय मेडिकल कॉलेज में अनिवार्य सेवा संबंधी बांड वैकल्पिक है। इसमें अनिवार्य सेवा का बांड भरने पर एमबीबीएस छात्र 40 हजार रुपये वार्षिक शिक्षण शुल्क और बांड न भरने वाले चार लाख रुपये वार्षिक शुल्क देंगे।

इसी प्रकार पीजी कोर्स एमडी/एमएस के बांड भरने वाले छात्र 60 हजार रुपये वार्षिक शुल्क और बांड न भरने वाले छात्र पांच लाख रुपये वार्षिक शुल्क देंगे।

इनका है कहना
लगभग सभी ने बांड भर दिए हैं। जिन्होंने बांड नही भरे हैं, वह भी भर देंगे। बांड भरवाने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है। पूर्ण सहमति से काम हो रहा है।
-प्रो. आईएस योग, प्राचार्या मेडिकल कॉलेज श्रीनगर

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