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बाहरी बाघों की दहाड़ से गूंजेगा राजाजी नेशनल पार्क

Mon, 01 May 2017 02:14 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 01 May 2017 02:14 PM IST
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three new tigers will come into rajaji national park from haldwani
tiger

राजाजी नेशनल पार्क में हल्द्वानी के बाघ दहाड़ेंगे। वन विभाग ने हल्द्वानी (तराई केंद्रीय वन प्रभाग) से तीन बाघों को लाने की तैयारी कर रहा है। इस काम में सेना की मदद लेने की भी मंशा है। राजाजी नेशनल पार्क अधिकारियों के अनुसार इसके लिए प्रारंभिक स्तर पर बातचीत भी हो गई है।

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राजाजी नेशनल पार्क के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र को जोड़ने वाले कॉरिडोर करीब बंद हो चुके है, इसके कारण बाघों का दोनों तरफ का अनुपात बिगड़ गया है। इसके मद्देनजर वन विभाग राजाजी नेशनल पार्क के पूर्वी क्षेत्र से आठ बाघों को निकाल कर पश्चिमी  क्षेत्र में पहुंचाना चाहता है, यह इलाका काफी बड़ा भी है।
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इस योजना के अलावा वन विभाग हल्द्वानी से सटे तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगल से भी तीन बाघों को निकाल कर राजाजी नेशनल पार्क के पश्चिमी क्षेत्र में ही रखने की योजना बनाई है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग में प्रोडेक्शन फारेस्ट के तहत सागौन, यूकेलिप्टस, पापुलर आदि प्रजाति के पेड़ का पौधरोपण कर जंगल तैयार किया गया है, ऐसे में तुलनात्मक तौर पर मिश्रित और प्राकृतिक जंगल की तुलना में यह जंगल वन्यजीवों को काम रास आता है। 

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हाथी भी निकालने पर हो चुका विचार

three new tigers will come into rajaji national park from haldwani
elephant

राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक सनातन कहते हैं कि तीन बाघों को तराई केंद्रीय वन प्रभाग से निकाल कर राजाजी नेशनल पार्क में लाने की योजना है। इस काम में सेना की भी मदद ली जाएगी। सेना की मदद से दूसरी जगह भी बाघों को एक से दूसरी जगह पहुंचाया गया है। इस बारे में बातचीत भी हो चुकी है। राजाजी नेशनल पार्क की पश्चिमी क्षेत्र का का वास स्थल बाघों की तुलना में शानदार है। 

हाथी भी निकालने पर हो चुका विचार
तराई केंद्रीय वन प्रभाग से जुड़ा गौला कारिडोर करीब बंद हो चुका है। इसके कारण करीब नौ हाथियों का झुंड एक निश्चित एरिया में फंस गया है। यह हाथी अक्सर आबादी के इलाके में फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में इन फंसे हाथियों को भी तराई केंद्रीय जंगल से निकाल दूसरे और घने जंगल में शिफ्ट करने की योजना पर प्रारंभिक तौर पर करीब दो साल पहले हल्द्वानी में मंथन हुआ था। पर योजना अमल में नहीं आ सकी।

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