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उत्तराखंड...टला नहीं है खतरा

Sun, 28 Jul 2013 09:59 AM IST
देहरादून/सुधाकर भट्ट
देहरादून/सुधाकर भट्ट Updated Sun, 28 Jul 2013 09:59 AM IST
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Threat is not over

भारी बरसात के कारण एक बार की आपदा झेल चुके उत्तराखंड पर अभी खतरा टला नही है। जून माह की बरसात के बाद भी बरसात का कहर लगातार जारी है।

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केदारनाथ घाटी में ही उलझी सरकार के सामने ऐसे में चुनौती लगातार बड़ी होती जा रही है। इस बार मानसून जल्दी आया और पहली ही झड़ी में प्रदेश को केदारघाटी और बदरीनाथ घाटी में तबाही का जख्म दे गया था।
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इसके बाद से ही बरसात लगातार जारी है और आपदाओं का कहर भी। पिछले तीन सालों में अगस्त और सितंबर के महीने ही प्रदेश के लिए भारी बरसात के कारण खतरनाक साबित हुए हैं।
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2010 की भारी बरसात ने सितंबर माह में ही तबाही मचाई थी। 2012 में भी अगस्त और सितंबर माह में ही भारी बरसात के कारण उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग में तबाही हुई थी।


ऐसे में मानसून के जल्द आने से यह नही कहा जा सकता कि मानसून का प्रभाव जल्दी समाप्त भी हो जाएगा। हाल यह है कि जाते-जाते जुलाई भी जख्म दे रहा है।

चमोली में बादल फटने से खासी तबाही हुई है। उत्तराखंड में अब तक 392 मिमी बरसात हुई है जो सामान्य 104 मिमी से 275 प्रतिशत अधिक है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिन फिर भारी बरसात की संभावना जताई है।

अगले पांच दिन के लिए ही फिर प्रदेश के अधिकतर जिलों में बरसात का अनुमान लगाया जा रहा है। मुसीबत यह है पहले ही भारी बरसात के कारण जर्जर हो चुके पहाड़ अब सामान्य बरसात में भी दरक रहे हैं।

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