जिसे ढूंढने में लोगों ने बहा दिया था पसीना, वह 48 साल बाद यहां खुदाई में मिली और फिर...
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मलारी हाईवे पर स्थित रविग्राम गांव में खुदाई के दौरान 48 वर्ष पूर्व दबी (300 वर्ष पुरानी) जाख देवता की मूर्ति को गांव के युवाओं ने खोज निकाला है। वर्ष 1970 में यहां जाख देवता का मंदिर आपदा के दौरान जमींदोज हो गया था। गांव में इस बार दिवारा यात्रा के दौरान गांव के बुजुर्गों ने युवाओं को होसी तोक में खुदाई करने की बात कही। इस पर युवाओं ने खुदाई की तो जाख देवता की मूर्ति मिल गई।
रविग्राम के होसी तोक में जाख देवता का पत्थरों से निर्मित प्राचीन मंदिर था। वर्ष 1970 में क्षेत्र में अतिवृष्टि और भू-धंसाव के चलते मंदिर जमींदोज हो गया था। तब ग्रामीण खुदाई कर समय-समय पर जाख देवता की मूर्ति को ढूंढने का प्रयास करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली।
मूर्ति को जाख देवता के अस्थायी मंदिर में किया स्थापित
बीते दिनों गांव में क्षेत्रपाल और जाख देवता की दिवारा यात्रा के बाद गांव के बुजुर्गों ने मूर्ति की खोज के लिए युवाओं को होसी तोक में ही खुदाई को कहा। 28 जनवरी से युवाओं ने होसी तोक में खुदाई शुरू की, जिसके बाद रविवार को यहां जाख देवता की कांसे की मूर्ति मिल गई। ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना के बाद मूर्ति को जाख देवता के अस्थायी मंदिर में स्थापित कर दिया।
जाख पूजा समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद डिमरी का कहना है कि गांव की पौराणिक धरोहर और परंपरा को निभाने के लिए मूर्ति को खोजने का निर्णय लिया गया। यह मूर्ति 300 साल पुरानी बताई जाती है। कहा कि जल्द ही गांव में बैठक कर जाख देवता के भव्य मंदिर निर्माण की योजना तैयार की जाएगी।
इस मौके पर महेंद्र नंबूरी, वीरेंद्र नेगी, रमेश डिमरी, किशन सिंह बिष्ट, समीर डिमरी, बदरी प्रसाद भुजवाण, रजनीश भुजवाण, महेंद्र राणा, मनोज नंबूरी और सुमित डिमरी आदि मौजूद थे।