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Dehradun News: चांदीपुरा और निपाह का खतरा नहीं, लक्षण मिलने पर डॉक्टर से सलाह लें
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Iदोनों ही वायरस की देशभर में चर्चा, उत्तराखंड में अभी वायरस को लेकर नहीं है कोई अलर्टI
इन दिनों बदलते मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। इसी बीच चांदीपुरा वायरस और निपाह वायरस देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, उत्तराखंड में इन वायरस को लेकर अलर्ट जारी नहीं है। लेकिन डॉक्टर का कहना है कि इस वायरस के लक्षण और बचाव जानने के बाद इससे बचना संभव है।
दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल के बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव मुखीजा ने बताया कि चांदीपुरा वायरस से गुजरात में बच्चों की मौत हुई हैं। वहीं, निपाह वायरस से केरल में एक किशोर की मौत हो गई। डॉ. गौरव ने बताया कि निपाह वायरस (एनआईवी) एक जूनोटिक वायरस है। यह वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। निपाह दूषित भोजन के माध्यम या सीधे लोगों के बीच भी फैल सकता है। संक्रमित लोगों में यह ए-सिम्प्टोमैटिक संक्रमण से लेकर तीव्र श्वसन बीमारी और घातक इंसेफेलाइटिस यानी दिमागी सूजन का कारण बन सकता है। इस संक्रमण से बचाव के लिए मरीज को आइसोलेट होना जरूरी होता है।
वहीं, निपाह वायरस में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, चक्कर आना, उनींदापन, मानसिक भ्रम, दौरे और मस्तिष्क की सूजन आ सकती है। चांदीपुरा वायरस से इंसेफेलाइटिस यानी दिमाग में सूजन तक हो सकती है। संक्रमण के दौरान शरीर के माइक्रोगियल सेल्स में माइक्रो आरएनए-21 की संख्या बढ़ने लगती है। इससे तेज बुखार, उल्टी, ऐंठन और कई मानसिक बीमारियां आ सकती हैं।
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इन दिनों बदलते मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। इसी बीच चांदीपुरा वायरस और निपाह वायरस देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, उत्तराखंड में इन वायरस को लेकर अलर्ट जारी नहीं है। लेकिन डॉक्टर का कहना है कि इस वायरस के लक्षण और बचाव जानने के बाद इससे बचना संभव है।
दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल के बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव मुखीजा ने बताया कि चांदीपुरा वायरस से गुजरात में बच्चों की मौत हुई हैं। वहीं, निपाह वायरस से केरल में एक किशोर की मौत हो गई। डॉ. गौरव ने बताया कि निपाह वायरस (एनआईवी) एक जूनोटिक वायरस है। यह वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। निपाह दूषित भोजन के माध्यम या सीधे लोगों के बीच भी फैल सकता है। संक्रमित लोगों में यह ए-सिम्प्टोमैटिक संक्रमण से लेकर तीव्र श्वसन बीमारी और घातक इंसेफेलाइटिस यानी दिमागी सूजन का कारण बन सकता है। इस संक्रमण से बचाव के लिए मरीज को आइसोलेट होना जरूरी होता है।
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वहीं, निपाह वायरस में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, चक्कर आना, उनींदापन, मानसिक भ्रम, दौरे और मस्तिष्क की सूजन आ सकती है। चांदीपुरा वायरस से इंसेफेलाइटिस यानी दिमाग में सूजन तक हो सकती है। संक्रमण के दौरान शरीर के माइक्रोगियल सेल्स में माइक्रो आरएनए-21 की संख्या बढ़ने लगती है। इससे तेज बुखार, उल्टी, ऐंठन और कई मानसिक बीमारियां आ सकती हैं।
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