{"_id":"676126bfd7b18dd6fa02bf3c","slug":"there-is-about-62-percent-reduction-in-tiger-deaths-in-the-uttarakhand-2024-12-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uttarakhand: राज्य में बाघों की मौत में करीब 62 प्रतिशत आई कमी, पिछले साल 21 की मौत हुई थी; देखें आंकड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarakhand: राज्य में बाघों की मौत में करीब 62 प्रतिशत आई कमी, पिछले साल 21 की मौत हुई थी; देखें आंकड़े
Tue, 17 Dec 2024 12:52 PM IST
हीरा मेहरा
विजेंद्र श्रीवास्तव
विजेंद्र श्रीवास्तव
Published by: हीरा मेहरा
Updated Tue, 17 Dec 2024 12:52 PM IST
सार
उत्तराखंड राज्य में बाघों की मौत में पिछले साल की तुलना में 61.90 प्रतिशत की कमी आई है। इस साल शिकार का कोई मामला भी रिपोर्ट नहीं हुआ।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राज्य में बाघों की मौत में पिछले साल की तुलना में 61.90 प्रतिशत की कमी आई है। इस साल शिकार का कोई मामला भी रिपोर्ट नहीं हुआ।
विज्ञापन
राज्य में बाघों की अच्छी खासी संख्या है। पिछले साल बाघों की मौत के मामले लगातार रिपोर्ट हुए। पहली मौत राज्य में 23 जनवरी को रिपोर्ट हुई उसके बाद मामले सामने आते गए। 27 दिसंबर तक प्रदेश में बाघों की मौत का आंकड़ा 21 तक पहुंच गया था। प्राकृतिक मौत के अलावा शिकार के मामले भी सामने आए। कुमाऊं में तीन बाघ की खाल जुलाई और सितंबर में बरामद की गई। इसमें जुलाई में बाघ की खाल बरामद हुई थी, उसकी लंबाई 11 फीट तक थी। वर्तमान साल बाघों के हिसाब से अब तक बेहतर रहा है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के अनुसार, राज्य में इस साल अब तक आठ बाघों की मौत हुई है।
विज्ञापन
12 साल में 132 बाघों की मौत
राज्य में 2012 से सितंबर-2024 तक 132 बाघों की मौत हुई। एनटीसीए के अनुसार, बाघों की मौत के मामले में देश में राज्य की स्थिति चौथी है।
बाघों की अप्राकृतिक मौतों को रोकने के लिए कदम उठाए गए हैं। पेट्रोलिंग और मॉनिटरिंग बेहतर की गई है। बाघों के वास स्थल के सुधार के भी प्रयास किए गए हैं। अगर बाघ को जंगल के अंदर भोजन और सुरक्षा मिलेगी तो वे बाहर कम आएंगे। इको टूरिज्म से जुड़े व्यक्ति भी वन विभाग की मदद करते हैं। पिछले साल शिकार के मामलों में जांच की जा रही है।
विज्ञापन
-रंजन मिश्रा, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव