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Dehradun News: पछवादून और जौनसार क्षेत्र में नहीं है कैंसर के उपचार की सुविधा
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I- मरीजों को उपचार के लिए दून अस्पताल किया जाता है रेफरI
पछवादून और जौनसार बावर के सरकारी अस्पतालों में कैंसर के उपचार की सुविधा नहीं है। यहां सामान्य ओपीडी में ही मरीजों को देखा जाता है। जांच में कैंसर के संदिग्ध लक्षण मिलने पर मरीजों को सीधा दून अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। क्षेत्रीय आबादी को देखते हुए यहां कैंसर केयर यूनिट खोलने की जरूरत है।
केंद्र सरकार के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में हर साल कैंसर से छह हजार लोगोें की मौत हो होती है। करीब 10 हजार से अधिक लोग कैंसर की चपेट में आते हैं। लेकिन, यहां के अधिकांश सरकारी अस्पताल में उपचार की सुविधा तो दूर कैंसर केयर यूनिट तक नहीं है।
पछवादून और जौनसार बावर की आबादी करीब पांच लाख है। यहां उप जिला अस्पताल विकासनगर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चकराता, साहिया और सहसपुर में सामान्य ओपीडी में ही मरीजों की देखा जाता है। कैंसर के लक्षण मिलने या जांच में पुष्टि होने की स्थिति में मरीजों दून अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। दून अस्पताल में भी केवल कीमोथेरेपी की सुविधा है। यहां रेडियोथेरपी और सर्जरी नहीं है। मजबूरी में कैंसर मरीजों को एम्स ऋषिकेश या हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट का रूख करना पड़ता है। स्थानीय लोग लगातार विकासनगर में कैंसर केयर यूनिट खोलने की मांग कर रहे हैं। डाकपत्थर में नए अस्पताल का निर्माण कार्य भी चल रहा है। ऐेसे में अब जगह की समस्या भी नहीं है।
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कैंसर केयर यूनिट खुलने से मिलेगा लाभ
पछवादून क्षेत्र में कैंसर केयर यूनिट खुलने से मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा। यूूनिट में एक फिजिशियन और अन्य स्टॉफ की तैनाती होती है। यहां मरीजों को कीमोथेरेपी के इंजेक्शन लगाने और ऑन्कोलॉजिस्ट से टेली कंसल्टेशन की सुविधा मिलती है। इससे मरीजों को हर बार हायर सेंटर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
Iअस्पताल में कैंसर केयर यूनिट नहीं है। सामान्य चिकित्सा ओपीडी में ही मरीज देखे जाते है। जांच में कैंसर के संदिग्ध लक्षण मिलने या पुष्टि होने पर मरीजों को दून अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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Iडॉ. विजय सिंह, चिकित्सा अधीक्षकI
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पछवादून और जौनसार बावर के सरकारी अस्पतालों में कैंसर के उपचार की सुविधा नहीं है। यहां सामान्य ओपीडी में ही मरीजों को देखा जाता है। जांच में कैंसर के संदिग्ध लक्षण मिलने पर मरीजों को सीधा दून अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। क्षेत्रीय आबादी को देखते हुए यहां कैंसर केयर यूनिट खोलने की जरूरत है।
केंद्र सरकार के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में हर साल कैंसर से छह हजार लोगोें की मौत हो होती है। करीब 10 हजार से अधिक लोग कैंसर की चपेट में आते हैं। लेकिन, यहां के अधिकांश सरकारी अस्पताल में उपचार की सुविधा तो दूर कैंसर केयर यूनिट तक नहीं है।
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पछवादून और जौनसार बावर की आबादी करीब पांच लाख है। यहां उप जिला अस्पताल विकासनगर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चकराता, साहिया और सहसपुर में सामान्य ओपीडी में ही मरीजों की देखा जाता है। कैंसर के लक्षण मिलने या जांच में पुष्टि होने की स्थिति में मरीजों दून अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। दून अस्पताल में भी केवल कीमोथेरेपी की सुविधा है। यहां रेडियोथेरपी और सर्जरी नहीं है। मजबूरी में कैंसर मरीजों को एम्स ऋषिकेश या हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट का रूख करना पड़ता है। स्थानीय लोग लगातार विकासनगर में कैंसर केयर यूनिट खोलने की मांग कर रहे हैं। डाकपत्थर में नए अस्पताल का निर्माण कार्य भी चल रहा है। ऐेसे में अब जगह की समस्या भी नहीं है।
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कैंसर केयर यूनिट खुलने से मिलेगा लाभ
पछवादून क्षेत्र में कैंसर केयर यूनिट खुलने से मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा। यूूनिट में एक फिजिशियन और अन्य स्टॉफ की तैनाती होती है। यहां मरीजों को कीमोथेरेपी के इंजेक्शन लगाने और ऑन्कोलॉजिस्ट से टेली कंसल्टेशन की सुविधा मिलती है। इससे मरीजों को हर बार हायर सेंटर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
Iअस्पताल में कैंसर केयर यूनिट नहीं है। सामान्य चिकित्सा ओपीडी में ही मरीज देखे जाते है। जांच में कैंसर के संदिग्ध लक्षण मिलने या पुष्टि होने पर मरीजों को दून अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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Iडॉ. विजय सिंह, चिकित्सा अधीक्षकI