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Dehradun News: जहां चालदा देवता वहां देश की दिवाली, बाकी जौनसार मनाए बूढ़ी दिवाली
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जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर अपनी अनूठी लोक संस्कृति और रीति रिवाज के लिए जाना जाता है। जनजातीय क्षेत्र में हर त्योहार को अनोखे अंदाज में मनाया जाता है। इन दिनोंं देश भर में दिवाली पर्व की तैयारियां जोरों पर चल रहीं हैं। वहीं जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में दिवाली के ठीक एक माह बाद पांच दिन की बूढ़ी दिवाली मनाने की परंपरा है। हालांकि यहां दो खत के गांवों में इस बार नई दिवाली मनाई जाएगी।
जौनसार बावर क्षेत्र में नई दिवाली वहीं मनाई जाती है, जहां चालदा महासू देवता प्रवास पर होते हैं। इन दिनों चालदा महासू देवता दसऊ में विराजमान है। चालदा महाराज की प्रवास यात्रा के कारण पशगांव खत के हाजा, दसऊ, गबेला, गमरी, मटियाना, क्वानू, भूपोऊ और बनगांव खत के घणता, कोल्हा, बिसोऊ, रावना, मेहरावना, कोटुवा, शिर्बा, मैपावटा में 12 नवंबर को नई दिवाली मनाई जाएगी।
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वहीं जौनसार बावर के अन्य क्षेत्रों में नई दिवाली के एक माह बाद पांच दिन बूढ़ी दिवाली मनाई जाएगी। मंगसीर मास की अमावस्या के साथ दिन का पर्व शुरू होता है। लोग होलियात, बिरुड़ी, जंदोई, काठ का हिरण और हाथी नृत्य के साथ हारुल, जैंता, रासों, जंगबाजी, जुड्डा नृत्य, बुढ़ियात आदि लोक नृत्य कर देवता का गुणगान करते हैं।
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Iइस वर्ष से पूर्व तक पशगांव खत में पारंपरिक रूप से सभी दिवाली पर्व मनाया जाता था। लेकिन एक मई से चालदा देवता खत पशगांव के दसऊ गांव के मंदिर में विराजमान हैं। चालदा महासू देवता के प्रवास यात्रा के दौरान देश के साथ मनाई जाने वाली दिवाली की परंपरा है। जिसके चलते पूरे खत के ग्रामवासी दीपावली मनाने के लिए 12 नवंबर को चालदा देवता मंदिर परिसर में उपस्थिति होंगे। - शूरवीर सिंह चौहान, सदर स्याणा, खत पशगांवI
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Iकोरू खत के सभी 17 गांवों में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार पांच दिनों तक चलने वाली जौनसारी दिवाली मनाई जाती है। अनूठी लोक संस्कृति और त्योहार ही जौनसार क्षेत्र की पहचान है। - सुनील जोशी, सदर स्याणा खत कोरू
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Iजौनसार बावर में पारंपरिक रीति रिवाजों से हर त्योहार मनाया जाता है। अब युवा वर्ग को अपनी लोक संस्कृति सहेज कर रखने के लिए अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना चाहिए। रोजगार और पढ़ाई के लिए शहर गए लोगों को त्योहार मनाने के लिए गांव आना चाहिए। - रजनीश पंवार, सदर स्याणा, खत बोंदूरI