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Dehradun News: साहित्य एवं शोध यात्रा का हनोल मंदिर में हुआ समापन
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Iहिमाचल के लोगों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करना था उद्देश्य
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Iधार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का किया गया अध्ययनI
लोक पंचायत की छह दिवसीय साहित्य एवं शोध यात्रा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पड़ाव को पार करते हुए अंतिम दिन महासू देवता मंदिर हनोल पहुंची। यहां मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने स्वागत किया।
लोक पंचायत के सदस्य श्रीचंद शर्मा ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश यात्रा का उद्देश्य साहित्य, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक रूप से दोनों ही प्रदेश में समानता होने के कारण परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करना था। जौनसार बावर केवल दो ब्लॉक, तीन तहसील और एक विधानसभा नहीं है। कहा कि अतीत को याद करते हैं तो उसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तरकाशी और टिहरी जनपद का भी बड़ा भाग आता था। यहां की सामाजिक एवं सांस्कृतिक मान्यता एक ही है।
जमुना तीर्थ समिति हरिपुर के अध्यक्ष इंजीनियर गंभीर चौहान ने कहा है कि पर्यटन, बागवानी के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने बहुत तरक्की की है। जबकि जौनसार बावर अभी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। लोक पंचायत के सदस्य सतपाल चौहान ने कहा कि आध्यात्मिक रूप से कहीं न कहीं हनोल स्थित महासू देवता का संबंध किन्नौर और कुल्लू से भी रहा है। इस रूप में भी इस साहित्य यात्रा में शोध और अध्ययन किया गया है।
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विधानसभा के पूर्व सूचना अधिकारी भारत चौहान ने कहा कि यात्रा में जहां मंदिरों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक, सांस्कृतिक रूप से अध्ययन किया गया। वहीं जौनसार बावर से लगे हुए हिमाचल के क्षेत्र का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया। कहा कि यात्रा के दौरान जो अनुभव सामने आए हैं, उसे कार्यकर्ताओं के साथ साझा करेंगे, ताकि वह भी पर्यटन और बागवानी के क्षेत्र में आगे बढ़ सके।
लोक पंचायत की साहित्य एवं शोध यात्रा हनोल पहुंचने पर महासू देवता प्रबंधन मंदिर समिति के सचिव मोहन लाल सेमवाल, प्रबंधक नरेंद्र नौटियाल, सहायक प्रबंधक विक्रम राजगुरु, पूरण नाथ, रोशन लाल, जगदीश नौटियाल आदि ने स्वागत किया।
Iइन स्थानों पर पहुंची लोक पंचायत की यात्राI
छह दिनों तक चली लोक पंचायत साहित्य यात्रा हिमाचल प्रदेश के पावटा से प्रारंभ होकर शिमला, किंगल, रामपुर बुशेहर, किनोर, रिकांगपिओ, कल्पा, कश्मीर (कोठी ग्राम पंचायत), कुल्लू जिले के आनी, रघुनाथ मंदिर कुल्लू, हिडिंबा देवी मंदिर मनाली, घटोत्कच मंदिर मनाली, नामक स्थान होते हुए खड़ा पत्थर रोहडू, हॉटकोटी होते हुए हनोल स्थित महासू देवता प्रांगण में संपन्न हुई।साहित्य एवं शोध यात्रा का हनोल मंदिर में हुआ समापन
लोक पंचायत की छह दिवसीय साहित्य एवं शोध यात्रा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पड़ाव को पार करते हुए अंतिम दिन महासू देवता मंदिर हनोल पहुंची। यहां मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने स्वागत किया।
लोक पंचायत के सदस्य श्रीचंद शर्मा ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश यात्रा का उद्देश्य साहित्य, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक रूप से दोनों ही प्रदेश में समानता होने के कारण परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करना था। जौनसार बावर केवल दो ब्लॉक, तीन तहसील और एक विधानसभा नहीं है। कहा कि अतीत को याद करते हैं तो उसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तरकाशी और टिहरी जनपद का भी बड़ा भाग आता था। यहां की सामाजिक एवं सांस्कृतिक मान्यता एक ही है।
जमुना तीर्थ समिति हरिपुर के अध्यक्ष इंजीनियर गंभीर चौहान ने कहा है कि पर्यटन, बागवानी के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने बहुत तरक्की की है। जबकि जौनसार बावर अभी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। लोक पंचायत के सदस्य सतपाल चौहान ने कहा कि आध्यात्मिक रूप से कहीं न कहीं हनोल स्थित महासू देवता का संबंध किन्नौर और कुल्लू से भी रहा है। इस रूप में भी इस साहित्य यात्रा में शोध और अध्ययन किया गया है।
विधानसभा के पूर्व सूचना अधिकारी भारत चौहान ने कहा कि यात्रा में जहां मंदिरों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक, सांस्कृतिक रूप से अध्ययन किया गया। वहीं जौनसार बावर से लगे हुए हिमाचल के क्षेत्र का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया। कहा कि यात्रा के दौरान जो अनुभव सामने आए हैं, उसे कार्यकर्ताओं के साथ साझा करेंगे, ताकि वह भी पर्यटन और बागवानी के क्षेत्र में आगे बढ़ सके।
लोक पंचायत की साहित्य एवं शोध यात्रा हनोल पहुंचने पर महासू देवता प्रबंधन मंदिर समिति के सचिव मोहन लाल सेमवाल, प्रबंधक नरेंद्र नौटियाल, सहायक प्रबंधक विक्रम राजगुरु, पूरण नाथ, रोशन लाल, जगदीश नौटियाल आदि ने स्वागत किया।
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Iधार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का किया गया अध्ययनI
लोक पंचायत की छह दिवसीय साहित्य एवं शोध यात्रा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पड़ाव को पार करते हुए अंतिम दिन महासू देवता मंदिर हनोल पहुंची। यहां मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने स्वागत किया।
लोक पंचायत के सदस्य श्रीचंद शर्मा ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश यात्रा का उद्देश्य साहित्य, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक रूप से दोनों ही प्रदेश में समानता होने के कारण परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करना था। जौनसार बावर केवल दो ब्लॉक, तीन तहसील और एक विधानसभा नहीं है। कहा कि अतीत को याद करते हैं तो उसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तरकाशी और टिहरी जनपद का भी बड़ा भाग आता था। यहां की सामाजिक एवं सांस्कृतिक मान्यता एक ही है।
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जमुना तीर्थ समिति हरिपुर के अध्यक्ष इंजीनियर गंभीर चौहान ने कहा है कि पर्यटन, बागवानी के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने बहुत तरक्की की है। जबकि जौनसार बावर अभी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। लोक पंचायत के सदस्य सतपाल चौहान ने कहा कि आध्यात्मिक रूप से कहीं न कहीं हनोल स्थित महासू देवता का संबंध किन्नौर और कुल्लू से भी रहा है। इस रूप में भी इस साहित्य यात्रा में शोध और अध्ययन किया गया है।
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विधानसभा के पूर्व सूचना अधिकारी भारत चौहान ने कहा कि यात्रा में जहां मंदिरों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक, सांस्कृतिक रूप से अध्ययन किया गया। वहीं जौनसार बावर से लगे हुए हिमाचल के क्षेत्र का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया। कहा कि यात्रा के दौरान जो अनुभव सामने आए हैं, उसे कार्यकर्ताओं के साथ साझा करेंगे, ताकि वह भी पर्यटन और बागवानी के क्षेत्र में आगे बढ़ सके।
लोक पंचायत की साहित्य एवं शोध यात्रा हनोल पहुंचने पर महासू देवता प्रबंधन मंदिर समिति के सचिव मोहन लाल सेमवाल, प्रबंधक नरेंद्र नौटियाल, सहायक प्रबंधक विक्रम राजगुरु, पूरण नाथ, रोशन लाल, जगदीश नौटियाल आदि ने स्वागत किया।
Iइन स्थानों पर पहुंची लोक पंचायत की यात्राI
छह दिनों तक चली लोक पंचायत साहित्य यात्रा हिमाचल प्रदेश के पावटा से प्रारंभ होकर शिमला, किंगल, रामपुर बुशेहर, किनोर, रिकांगपिओ, कल्पा, कश्मीर (कोठी ग्राम पंचायत), कुल्लू जिले के आनी, रघुनाथ मंदिर कुल्लू, हिडिंबा देवी मंदिर मनाली, घटोत्कच मंदिर मनाली, नामक स्थान होते हुए खड़ा पत्थर रोहडू, हॉटकोटी होते हुए हनोल स्थित महासू देवता प्रांगण में संपन्न हुई।साहित्य एवं शोध यात्रा का हनोल मंदिर में हुआ समापन
लोक पंचायत की छह दिवसीय साहित्य एवं शोध यात्रा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पड़ाव को पार करते हुए अंतिम दिन महासू देवता मंदिर हनोल पहुंची। यहां मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने स्वागत किया।
लोक पंचायत के सदस्य श्रीचंद शर्मा ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश यात्रा का उद्देश्य साहित्य, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक रूप से दोनों ही प्रदेश में समानता होने के कारण परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करना था। जौनसार बावर केवल दो ब्लॉक, तीन तहसील और एक विधानसभा नहीं है। कहा कि अतीत को याद करते हैं तो उसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तरकाशी और टिहरी जनपद का भी बड़ा भाग आता था। यहां की सामाजिक एवं सांस्कृतिक मान्यता एक ही है।
जमुना तीर्थ समिति हरिपुर के अध्यक्ष इंजीनियर गंभीर चौहान ने कहा है कि पर्यटन, बागवानी के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने बहुत तरक्की की है। जबकि जौनसार बावर अभी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। लोक पंचायत के सदस्य सतपाल चौहान ने कहा कि आध्यात्मिक रूप से कहीं न कहीं हनोल स्थित महासू देवता का संबंध किन्नौर और कुल्लू से भी रहा है। इस रूप में भी इस साहित्य यात्रा में शोध और अध्ययन किया गया है।
विधानसभा के पूर्व सूचना अधिकारी भारत चौहान ने कहा कि यात्रा में जहां मंदिरों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक, सांस्कृतिक रूप से अध्ययन किया गया। वहीं जौनसार बावर से लगे हुए हिमाचल के क्षेत्र का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया। कहा कि यात्रा के दौरान जो अनुभव सामने आए हैं, उसे कार्यकर्ताओं के साथ साझा करेंगे, ताकि वह भी पर्यटन और बागवानी के क्षेत्र में आगे बढ़ सके।
लोक पंचायत की साहित्य एवं शोध यात्रा हनोल पहुंचने पर महासू देवता प्रबंधन मंदिर समिति के सचिव मोहन लाल सेमवाल, प्रबंधक नरेंद्र नौटियाल, सहायक प्रबंधक विक्रम राजगुरु, पूरण नाथ, रोशन लाल, जगदीश नौटियाल आदि ने स्वागत किया।