रूढ़ियों के बंधन तोड़ती एक प्रेम कहानी
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पहाड़ का कोई गांव सूरज की रोशनी में अपने नजारों, हरे-भरे जंगलों, झरनों-धारों की वजह से जितना लुभाता है, रात के वक्त उतना ही बियाबान भी नजर आता है। गांववाले जंगली जानवरों से तो डरते ही हैं, लेकिन इससे अधिक आक्रांत उन्हें करते हैं वे अंधविश्वास, जिनसे वे पीढ़ियों से बंधे हैं।
प्रेतात्मा, जादू-टोना और ग्रामीणों के प्रवेश के लिए वर्जित घनघोर जंगल वाले ऐसे ही एक गांव में पनपती है एक प्रेम कहानी ‘द डार्क रोमांस’। तमाम बाधाओं से पार पाकर यह कहानी रूढ़ियों की स्याही को पोंछकर मुकाम हासिल करती है।
उत्तराखंड के नवोदित रचनाकार अंकित गुसाईं का यह पहला उपन्यास है, जिसे लीडस्टार्ट पब्लिकेशन मुंबई ने प्रकाशित किया है। मूलत: पौड़ी गढ़वाल के अगरोड़ा गांव निवासी और दून में बलबीर रोड पर रहने वाले अंकित के उपन्यास का नायक आशु (आशुतोष) दून का रहने वाला है।
बीटेक थर्ड ईयर का छात्र आशु दून निवासी प्रियंका को चाहता है। दोनों का ननिहाल एक ही गांव में है और प्रत्येक छुट्टी में दोनों गांव में मिलते हैं।
प्रेम कहानी के साथ अंधविश्वास पर गहरी चोट
ऐसी ही एक छुट्टी में गांव में अंधविश्वासों से उनका सामना होता है। गांववालों की ताकीद के बावजूद दोनों रात को मिलते हैं। एक दिन उस जंगल में पहुंच जाते हैं, जहां प्रेतात्मा रहती है। प्रियंका को आत्मा अपनी वश में कर लेती है। प्रियंका के परिजन आशु को जिम्मेदार ठहराते हैं।
गांव में ही रहकर जादू-टोना करने वाली रश्मि देवी प्रियंका को बचाने का दावा करती है और तंत्र-मंत्रों के साथ मानव रक्त चढ़ाने की बात करती है। आशु इसके लिए तैयार हो जाता है। उसे बचाने के लिए उसके दोस्त विकास और प्रशांत एक रहस्यमयी शख्स केदार बाबा को लेकर पहुंचते हैं।
लोग इस शख्स को बाबा जरूर कहते हैं, लेकिन असल में वह न सिर्फ तंत्र-मंत्र के खिलाफ है, बल्कि गांवों में बलि प्रथा बंद कराने की अलख भी जगा रहा है। केदार बाबा प्रेतजाल से प्रियंका को बचा निकालते हैं।
इसके साथ ही खुलते हैं कई राज कि कैसे गांववाले प्रेतात्मा के नाम पर छले जा रहे थे और कैसे कुछ लोग उनके अंधविश्वास का फायदा उठा रहे थे। आखिर आशु को गलत ठहराने वाले ग्रामीण, प्रियंका के परिजन उसे सिर आंखों पर बैठाते हैं और आशु को प्रियंका का साथ मिल जाता है।
दिखता है चेतन भगत का असर
अंकित का यह उपन्यास फिक्शन और रोमांटिक थ्रिलर है। चेतन भगत को प्रेरणा मानने वाले अंकित के अंदाज में ‘वन नाइट एट ए काल सेंटर’ का कुछ असर दिखता है। अंकित कहते हैं कि उन्हें प्रेमचंद भी भाते हैं। शायद यही वजह है कि उनकी कहानी गांव में पलती-बढ़ती है।
अंकित का बचपन पहाड़ पर ही बीता है, लिहाजा कहानी में पौड़ी, कोटद्वार, श्रीनगर, खैरालिंग का मेला जैसे गढ़वाल के नगरों, परंपराओं का जिक्र आता है। अंकित ने उपन्यास में युवा प्रेम कहानी में बाधाओं की चुनौतियों को इस तरह पिरोया है कि यह अंत तक बांधे रखता है। साथ ही यह युवा रचनाकार पारंपरिक मेलों में निरीह पशुओं की बलि पर भी सवाल उठाता है।
अंकित के बारे में
पिता: मोहन सिंह गुसाईं (सेना से सेवानिवृत्त और अब हरिद्वार की एक कंपनी में कार्यरत)
माता: कमला देवी गुसाईं (गृहिणी)
शिक्षा: उत्तरांचल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी देहरादून से बीटेक
लक्ष्य: सरकारी सेवाओं की तैयारी के साथ लगातार लेखन कार्य
संदेश: मेरी तरह लिखना चाहने वाले युवा साथी पढ़ने की आदत रखें। इनोवेटिव स्टोरी लाइन वाली फिल्में देखें। इनसे आइडिया मिलते हैं और क्रिएटिविटी बढ़ती है।