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Dehradun News: तोड़ी गई दुकान बनाकर दे प्रशासन, 10 लाख रुपये हर्जाना भी
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उच्च न्यायालय के आदेश पर चले अतिक्रमण हटाओ अभियान में तोड़ी गई दुकान प्रशासन को दोबारा बनाकर देनी होगी। यही नहीं प्रशासन अब दुकानदार को 10 लाख रुपये हर्जाने के तौर पर भी अदा करेगा। ये आदेश पीड़ित दुकानदार की याचिका पर अपर जिला जज प्रथम महेश चंद कौशिबा की अदालत ने दिए हैं। अदालत ने माना कि प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करते हुए दुकानदार को कोई नोटिस नहीं दिया। जबकि, उसने न तो सड़क पर अतिक्रमण किया था और न ही वह अवैध कब्जाधारी था। ऐसे में प्रशासन के इस काम को अदालत ने कानून का मखौल उड़ाने वाला भी बताया है।
याचिका महेश मलिक निवासी राजपुर रोड, दिलाराम बाजार ने दायर की थी। वह क्षेत्र में ही चिकन प्वाइंट नाम से एक दुकान चलाते हैं। जिस जगह पर यह दुकान है वह सिंचाई विभाग की थी और वर्ष 1990 में इसे दृशपाल सिंह बिष्ट को आवंटित किया गया था। तब से यह लीज पर चल रही थी।
यह जमीन उन्होंने दृशपाल सिंह बिष्ट से महेश मलिक ने किराए पर ली थी और इस पर टिनशेड डालकर अपनी दुकान चला रहे थे। वर्ष 2018 में उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद देहरादून में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया और पूरे शहर में यह अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया।
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इसी बीच 24 अक्तूबर 2020 को अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत टीम महेश मलिक की इस दुकान पर भी पहुंची। टीम ने बुल्डोजर से न सिर्फ ढांचा ढहाया बल्कि वहां रखे डीप फ्रीजर व अन्य सामान को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
इस तरह महेश मलिक का करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इस याचिका में महेश मलिक ने उत्तराखंड राज्य, एमडीडीए, डीके सिंह तत्कालीन अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग, विजय सिंह रावत तत्कालीन एई सिंचाई विभाग, नागेंद्र प्रसाद पंत तत्कालीन डीआरओ सिंचाई विभाग और युसूफ, जिलेदार, सिंचाई विभाग को विपक्षी बनाया।
मामले में जब सुनवाई हुई तो प्रशासन व अन्य विपक्षियों ने तर्क दिया कि उन्होंने महेश मलिक को बाकायदा नोटिस जारी किया था। लेकिन, इसके सापेक्ष वह कोई लिखित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए। लिहाजा कोर्ट ने याचिकाकर्ता की शिकायत को सही पाया। कोर्ट ने पिछले दिनों बुल्डोजर से कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजीर मानते हुए देहरादून प्रशासन के इस कृत्य को कानून का मखौल उड़ाने वाला बताया। इस तरह कोर्ट ने सभी विपक्षियों को महेश मलिक की दुकान पहले के जैसी बनाकर देने का फैसला सुनाया है। इसके साथ ही 10 लाख रुपये हर्जाना देने के आदेश भी अदालत ने दिए हैं।
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याचिका महेश मलिक निवासी राजपुर रोड, दिलाराम बाजार ने दायर की थी। वह क्षेत्र में ही चिकन प्वाइंट नाम से एक दुकान चलाते हैं। जिस जगह पर यह दुकान है वह सिंचाई विभाग की थी और वर्ष 1990 में इसे दृशपाल सिंह बिष्ट को आवंटित किया गया था। तब से यह लीज पर चल रही थी।
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यह जमीन उन्होंने दृशपाल सिंह बिष्ट से महेश मलिक ने किराए पर ली थी और इस पर टिनशेड डालकर अपनी दुकान चला रहे थे। वर्ष 2018 में उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद देहरादून में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया और पूरे शहर में यह अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया।
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इसी बीच 24 अक्तूबर 2020 को अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत टीम महेश मलिक की इस दुकान पर भी पहुंची। टीम ने बुल्डोजर से न सिर्फ ढांचा ढहाया बल्कि वहां रखे डीप फ्रीजर व अन्य सामान को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
इस तरह महेश मलिक का करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इस याचिका में महेश मलिक ने उत्तराखंड राज्य, एमडीडीए, डीके सिंह तत्कालीन अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग, विजय सिंह रावत तत्कालीन एई सिंचाई विभाग, नागेंद्र प्रसाद पंत तत्कालीन डीआरओ सिंचाई विभाग और युसूफ, जिलेदार, सिंचाई विभाग को विपक्षी बनाया।
मामले में जब सुनवाई हुई तो प्रशासन व अन्य विपक्षियों ने तर्क दिया कि उन्होंने महेश मलिक को बाकायदा नोटिस जारी किया था। लेकिन, इसके सापेक्ष वह कोई लिखित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए। लिहाजा कोर्ट ने याचिकाकर्ता की शिकायत को सही पाया। कोर्ट ने पिछले दिनों बुल्डोजर से कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजीर मानते हुए देहरादून प्रशासन के इस कृत्य को कानून का मखौल उड़ाने वाला बताया। इस तरह कोर्ट ने सभी विपक्षियों को महेश मलिक की दुकान पहले के जैसी बनाकर देने का फैसला सुनाया है। इसके साथ ही 10 लाख रुपये हर्जाना देने के आदेश भी अदालत ने दिए हैं।