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दस संवासिनियां पहुंची दून अस्पताल, मचा हड़कंप
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 12 May 2016 04:43 AM IST
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संवासिनियों को दून अस्पताल लाने की खबर से हड़कंप मच गया।
- फोटो : file photo
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नारी निकेतन में रहने वाली 10 संवासिनियों की तबीयत बुधवार को खराब हो गई। उनको तत्काल दून अस्पताल लाया गया। विभाग के अधिकारियों को घबराहट थी तो यही की कहीं फिर से कोई बवाल न हो जाए। गर्मी में संवासिनियों को डिहाइड्रेशन की दिक्कत होने लगी थी, हालांकि उन्हें रुटीन चेकअप के नाम पर अस्पताल लाया गया। इनमें से एक मानसिक रुप से कमजोर संवासिनी को पेट दर्द की शिकायत पर भर्ती करा दिया गया।
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बुधवार को 10 संवासिनियों को दून अस्पताल लाया गया। इन संवासिनियों को डिहाइड्रेशन और मौसमी बीमारी थी। वहीं विभाग की ओर से इन्हें रुटीन चेकअप के नाम पर अस्पताल लाया गया। इनमें से 4 संवासिनियों की खून की जांच और दो का अल्ट्रासाउंड किया गया। तीन संवासिनियों का आयु परीक्षण किया गया।
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मंगलवार रात संवासिनी के पेट में उठा दर्द
मंगलवार रात को मानसिक रूप से बीमार संवासिनी पुष्पा के पेट में दर्द उठा। इसके साथ ही कुछ संवासिनियां और मौसमी बीमारी से जूझ रही थी। बुधवार को पुष्पा सहित बाकि दस संवासिनियों को दून अस्पताल लाया गया। पुष्पा के चेकअप के बाद डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर लिया। इसके साथ ही कंचन, मीनाक्षी, जमुना, सरोज के खून की जांच की गई। गुड्डी और अनीता का अल्ट्रासाउंड किया गया। इन सभी को रुटीन चेकअप और दवाई देने के साथ ही घर वापस भेज दिया गया।
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बांग्लादेश की लाबोनी और पूजा, बर्मा की काजल का आयु परीक्षण किया गया। इस संबंध में प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर आयु परीक्षण वाली संवासिनियों की रिपोर्ट आने के बाद उन्हें घर भेज दिया जाएगा। बताया कि बाकि संवासिनियों को रुटीन चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया गया था। इसके साथ ही जिन्हें परेशानी थी, उन्हें दवा दिला दी गई है। --
पहले कभी नहीं हुई ऐसी चिंता
अब नारी निकेतन और यहां की स्थिति एकदम बदली हुई है। संवासिनियों को पेट दर्द हो या हल्की सी मौसमी बीमारी, विभाग सतर्क रहता है। इन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती किया जाता है। इतना ही नहीं अधिकारियों को यह चिंता सताती है कि कहीं किसी संवासिनी को कुछ हो गया तो बवाल हो जाएगा।
पहले की बात करें तो बीमारी के अभाव में हाल ही में लगातार तीन संवासिनियां दम तोड़ चुकी है। इन तीन को तो फिर भी अस्पताल तक पहुंचना नसीब हो गया था। वरना कई संवासिनियां तो ऐसी भी रही जो इलाज के लिए तरसती रही और आखिरकार चल बसी। यह चुस्ती यदि शुरु से विभाग दिखाता तो कई संवासिनियों की जान बचाई जा सकती थी।