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तहसील दिवस : नवंबर में नहीं खुला शिकायत का खाता, अक्तूबर में आए मात्र सात फरियादी
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IIमाह के पहले और तीसरे मंगलवार को तहसील दिवस आयोजित होता है। लेकिन, पिछले दो महीनों से तहसील दिवस में फरियादियों का टोटा पड़ गया है। अक्तूबर में दो बार हुए तहसील दिवसों में कुल सात लोग शिकायत लेकर पहुंचे, तो नवंबर में एक भी शिकायत नहीं आई।I
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Iइस पर प्रशासनिक अफसर इस पर कहते हैं कि पिछला महीना त्योहारों में निकल गया, जबकि इस बार पूरा प्रशासन इन्वेस्टर्स समिट में लगा है, संभव है कि इसका असर तहसील दिवस पर पड़ रहा हो। गौरतलब हो कि डीएम सोनिका ने बड़े जोरशोर के साथ तहसील दिवस का आयोजन पुन: शुरू कराया था। इसमें ऐसे मामलों को त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए गए थे, जिनके निस्तारण सामान्य दिनों में नहीं हो पाते। खसरा-खतौनी से लेकर वसीयत व राजस्व के सभी प्रकार के मामलों की सुनवाई तहसील दिवस में करने के लिए कहा गया था। प्रारंभिक महीनों में तहसील दिवसों को लेकर काफी उत्साह मिला। लेकिन, अब तहसील दिवसों में लोगों ने आना बंद कर दिया है।
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Iफरियादी नहीं आते, अफसर भी नहीं रहते
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Iदून में तहसील दिवस लगा लेकिन सिर्फ खानापूर्ति के लिए। तहसील कॉम्पलेक्स के कमरा नंबर-22 में एक बैनर लगा दिया गया, जिस पर तहसील दिवस लिखा था। वहां पर आवेदन पत्र लेने के लिए एक महिला बैठी हुई थी। उनसे जब पूछा गया कि कितने आवेदन आए हैं तो उन्होंने बताया कि इस महीने में अब तक कोई भी शिकायत नहीं आई है। पिछले महीने में आई शिकायतों के बारे में पूछने पर पता चला कि पिछले महीने मात्र सात शिकायतें आई थीं।
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Iकमरे में बैठे राजस्वकर्मी, निपटा रहे काम
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Iतहसील दिवस के लिए कोई अफसर बेशक न बैठा हो, लेकिन कमरा खचाखच भरा हुआ है। राजस्वकर्मी बैठकर अपना काम निपटा रहे हैं। सामान्य दिनों की तरह लोग आ रहे हैं और अपनी खसरा-खतौनी से लेकर अन्य कार्य करा रहे हैं।
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Iपहले लोग अमूमन पेंशन की शिकायत लेकर आते थे। लेकिन, जब से ऑनलाइन सिस्टम हुआ है, लोग अपनी समस्याओं को या तो ऑनलाइन भेज रहे हैं या सीधे जनसुनवाई में डीएम के पास जा रहे हैं। - अनीता कनौजिया, कनिष्ठ सहायक
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Iअभी पूरा सरकारी महकमा इन्वेस्टर्स समिट में लगा है। इस कारण काफी कार्य प्रभावित हैं। इन्वेस्टर्स समिट के निपटते ही सिस्टम को फिर से दुरुस्त किया जाएगा। जनता दरबार में आमजन की शिकायतों को लगातार सुना जा रहा है। - सोनिका, डीएम, देहरादूनI
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IIमाह के पहले और तीसरे मंगलवार को तहसील दिवस आयोजित होता है। लेकिन, पिछले दो महीनों से तहसील दिवस में फरियादियों का टोटा पड़ गया है। अक्तूबर में दो बार हुए तहसील दिवसों में कुल सात लोग शिकायत लेकर पहुंचे, तो नवंबर में एक भी शिकायत नहीं आई।I
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Iइस पर प्रशासनिक अफसर इस पर कहते हैं कि पिछला महीना त्योहारों में निकल गया, जबकि इस बार पूरा प्रशासन इन्वेस्टर्स समिट में लगा है, संभव है कि इसका असर तहसील दिवस पर पड़ रहा हो। गौरतलब हो कि डीएम सोनिका ने बड़े जोरशोर के साथ तहसील दिवस का आयोजन पुन: शुरू कराया था। इसमें ऐसे मामलों को त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए गए थे, जिनके निस्तारण सामान्य दिनों में नहीं हो पाते। खसरा-खतौनी से लेकर वसीयत व राजस्व के सभी प्रकार के मामलों की सुनवाई तहसील दिवस में करने के लिए कहा गया था। प्रारंभिक महीनों में तहसील दिवसों को लेकर काफी उत्साह मिला। लेकिन, अब तहसील दिवसों में लोगों ने आना बंद कर दिया है।
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Iफरियादी नहीं आते, अफसर भी नहीं रहते
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Iदून में तहसील दिवस लगा लेकिन सिर्फ खानापूर्ति के लिए। तहसील कॉम्पलेक्स के कमरा नंबर-22 में एक बैनर लगा दिया गया, जिस पर तहसील दिवस लिखा था। वहां पर आवेदन पत्र लेने के लिए एक महिला बैठी हुई थी। उनसे जब पूछा गया कि कितने आवेदन आए हैं तो उन्होंने बताया कि इस महीने में अब तक कोई भी शिकायत नहीं आई है। पिछले महीने में आई शिकायतों के बारे में पूछने पर पता चला कि पिछले महीने मात्र सात शिकायतें आई थीं।
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Iकमरे में बैठे राजस्वकर्मी, निपटा रहे काम
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Iतहसील दिवस के लिए कोई अफसर बेशक न बैठा हो, लेकिन कमरा खचाखच भरा हुआ है। राजस्वकर्मी बैठकर अपना काम निपटा रहे हैं। सामान्य दिनों की तरह लोग आ रहे हैं और अपनी खसरा-खतौनी से लेकर अन्य कार्य करा रहे हैं।
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Iपहले लोग अमूमन पेंशन की शिकायत लेकर आते थे। लेकिन, जब से ऑनलाइन सिस्टम हुआ है, लोग अपनी समस्याओं को या तो ऑनलाइन भेज रहे हैं या सीधे जनसुनवाई में डीएम के पास जा रहे हैं। - अनीता कनौजिया, कनिष्ठ सहायक
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Iअभी पूरा सरकारी महकमा इन्वेस्टर्स समिट में लगा है। इस कारण काफी कार्य प्रभावित हैं। इन्वेस्टर्स समिट के निपटते ही सिस्टम को फिर से दुरुस्त किया जाएगा। जनता दरबार में आमजन की शिकायतों को लगातार सुना जा रहा है। - सोनिका, डीएम, देहरादूनI