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टिहरी बांध: पहली बार पंप स्टोरेज प्लांट के निर्माण से देश को मिलेगी एक हजार मेगावाट बिजली

Sun, 07 Nov 2021 12:50 PM IST
अलका त्यागी विजय दास, अमर उजाला, नई टिहरी
विजय दास, अमर उजाला, नई टिहरी Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 07 Nov 2021 12:50 PM IST
सार

Tehri Dam: टिहरी बांध परियोजना 2400 मेगावाट की है, जिसमें से एक हजार मेगावाट मुख्य बांध और 400 मेगावाट कोटेश्वर बांध से बिजली उत्पादन हो रहा है। 

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Tehri Dam: India will get one thousand MW electricity by  construction of pump storage plant For the first time
टिहरी बांध - फोटो : PTI

विस्तार

टिहरी बांध परियोजना दिसंबर 2022 तक अपनी क्षमता के अनुरूप बिजली उत्पादन शुरू कर देगी। टीएचडीसी की द्वितीय चरण की एक हजार मेगावाट की पीएसपी (पंप स्टोरेज प्लांट) का निर्माण अंतिम दौर में है।

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भूमिगत इस महत्वपूर्ण परियोजना का निर्माण पूरा होने से देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी होने के साथ ही टीएचडीसी के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ जाएगी। इससे जहां एक हजार मेगावाट बिजली उत्पादन होगा वहीं स्थानीय लोगों को लाभ होगा। बिजली उत्पादन से मिलने वाले राजस्व की दो फीसदी धनराशि सीएसआर मद से बांध प्रभावित क्षेत्र के विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी।
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टिहरी बांध परियोजना 2400 मेगावाट की है, जिसमें से एक हजार मेगावाट मुख्य बांध और 400 मेगावाट कोटेश्वर बांध से बिजली उत्पादन हो रहा है। जबकि एक हजार मेगावाट की पीएसपी परियोजना का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था। पीएसपी का सिविल कार्य एचसीसी, हाइड्रो, इलेक्ट्रो मैकेनिकल कार्य जीई हाइड्रो फ्रांस एवं जीई पावर इंडिया कंपनी कर रही है।
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वर्तमान में सिविल, हाइड्रो मैकेनिकल के 90 फीसदी कार्य पूरे कर दिए गए हैं जबकि इलेक्ट्रो मैकेनिकल का 85 फीसदी कार्य हो चुका है। परियोजना के निर्माण पर 22 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। टिहरी बांध परियोजना के डाउनस्ट्रीम में स्थित कोटेश्वर बांध की झील से अपस्ट्रीम में स्थित टिहरी बांध झील में जल को पंपिंग कर पहुंचाया जाएगा, जिससे चार टरबाइनों को चलाकर बिजली उत्पादन किया जाएगा। बिजली उत्पादन ग्रिड की मांग के अनुसार होगा। 

देश की पहली परियोजना जहां होगा 1000 मेगावाट बिजली उत्पादन

पंप स्टोरेज परियोजना देश की पहली परियोजना होगी, जिससे 1000 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। टीएचडीसी को 2016 में पीएसपी का निर्माण करना था, लेकिन विभिन्न तकनीकी और स्थानीय दिक्कतों के कारण पीएसपी पूरी नहीं हो पाई। यदि अब सब कुछ ठीकठाक रहा तो टीएचडीसी दिसंबर 2022 तक निर्माण कार्य पूरा कर बिजली उत्पादन शुरू कर देगी।

इसके लिए इन दिनों तेजी से काम किया जा रहा है। इस परियोजना के बन जाने से जहां एक ओर देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी होगी, वहीं टीएचडीसी से लेकर स्थानीय लोगों को भी फायदा होगा। टीएचडीसी बिजली उत्पादन से अच्छी आय अर्जित करेगी, जिसकी दो फीसदी धनराशि टीएचडीसी सामाजिक दायित्व मद से बांध प्रभावित क्षेत्र के विकास पर खर्च करेगी। 

पीएसपी की विशेषता
एक हजार मेगावाट की पंप स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) के निर्माण से कोई भी गांव प्रभावित नहीं हुआ है। परियोजना के मुख्य बांध के अंदर ही विभिन्न सुरंगों और अन्य निर्माण किया जा रहा है। साथ ही टिहरी और कोटेश्वर बांध से बिजली उत्पादन से निकालने वाले पानी को रिसाइकिल कर बिजली उत्पादन किया जाएगा। परियोजना का अपस्ट्रीम व्यास लगभग 21 मी., ऊंचाई 140 मी. है, डाउनस्ट्रीम व्यास 18 मी., ऊंचाई 80 मी. है। मुख्य पावर हाउस, जिसकी चौड़ाई 25.4 मीटर, ऊंचाई 55 मी., लंबाई 203 मी. है। दो मुख्य सुरंगें हैं, जिनमें से एक का व्यास 9 मी. एवं लंबाई लगभग 1150 मी., दूसरी का व्यास 6 मी. और लंबाई 1500 मी है।

टिहरी बांध की द्वितीय चरण की परियोजना पीएसपी का निर्माण अंतिम चरण है। करीब 90 फीसदी कार्य पूरा हो गया है। दिसंबर 2022 तक पीएसपी से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएसपी के बन जाने से देश को 1000 हजार मेगावाट बिजली मिलेगी।
- यूके सक्सेना, अधिशासी निदेशक टीएचडीसी इंडिया टिहरी।

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