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Teacher's Day: किसी फिल्म से कम नहीं इस सरकारी स्कूल के शिक्षक की कहानी, पढ़िए

Mon, 04 Sep 2017 07:59 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 04 Sep 2017 07:59 PM IST
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Teachers day 2017 special story on rajesh joshi

श‌िक्षक द‌िवस के मौके पर हम आपको म‌िला रहे हैं एक ऐसे श‌‌िक्षक से ज‌िसकी कहानी क‌िसी फ‌िल्म से कम नहीं है। फ‌िल्म तारे जमीन पर तो आपने देखी ही होगी। जी हां, इस सरकारी स्कूल की कहानी इस फ‌िल्म की कहानी से कम नहीं है। जैसे फ‌िल्म में आम‌िर खान एक मंदबुद्घ‌ि बच्चे को एक स्मार्ट स्टूडेंट बनाता है। वैसे ही इस स्कूल में भी एक श‌‌िक्षक ऐसा है ज‌िसने बच्चों की ज‌िंदगी बदल दी। श‌िक्षक के पढ़ाई के तरीके ने मंदबुद्घ‌ि बच्चों को भी ब्रिल‌ियंट स्टूडेंट बना द‌िया। आगे पढ़‌िए पूरी कहानी...

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उत्तरकाशी में भी एक ऐसा शिक्षक है जो न केवल बच्चों को पढ़ाने के लिए सरल तरीके अपनाता है। बल्कि साथ ही सांस्कृतिक, अनुशासन और समाज सेवा के प्रति भी उन्हें प्रेरित करता आ रहा है।  
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डुंडा ब्लॉक के राइंका कवां एटहाली में तैनात सहायक अध्यापक राजेश जोशी शिक्षक के उस परंपरागत खांचे से बाहर निकल कर बच्चों का बौद्धिक और शैक्षिक विकास कर रहे हैं जो अक्सर आमतौर पर शिक्षकों के द्वारा देखने को नहीं मिलता है। 
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उन्होंने अपने संसाधनों से विज्ञान सहित अन्य विषयों की कार्ययोजना तैयार की है और हाईस्कूल के बच्चों में विज्ञान विषय के प्रति दिलचस्पी पैदा करने को अपना लैपटॉप निकालकर अलग तरीके से पढाना शुरू कर दिया है।

​नये व रोचक तरीकों के जरिये वीडियो, फोटो व प्रयोगशाला में काम कराया

Teachers day 2017 special story on rajesh joshi

​नये व रोचक तरीकों के जरिये वीडियो, फोटो व प्रयोगशाला में प्रयोग के जरिये बच्चों को पढाने का परिणाम यह हुआ कि बच्चों को सौर मंडल, स्पैक्ट्रम, जटिल रासायनिक क्रियाओं सहित विषय संबंधी जानकारी सरलता से समझ में आने लगी।

ग्रामीण परिवेश के ये बच्चे घर पर अध्ययन कर आत्मविश्वास के साथ सवाल भी पूछने लगे। छात्रों को परीक्षा के अतिरिक्त दबाव से कैसे बचाया जाये इसके लिये उन्होंने स्वयं का सिस्टम विकसित किया है।

उन्होंने प्रश्न पत्र तैयार कर प्रत्येक सप्ताह पढाये गये पाठ की परीक्षा ली। यही नहीं वे अपने चिकित्सीय ज्ञान से बच्चों की खून जांच, स्वास्थ्य परीक्षण तथा मौसमी बीमारियों के प्रति जागरूक करने के साथ ही उन्हे चिकित्सीय सलाह भी देते हैं। अपनी माटी व पहचान से दूर होती युवा पीढ़ी को इससे जोडने के लिय स्कूली स्तर पर गढ़वाली कविता, लेखन आदि की कार्ययोजना पर कार्य कर रहे हैं।

कठपुतली को भी माध्यम बनाया गया

Teachers day 2017 special story on rajesh joshi

स्काउट अध्यापक की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने इस जिम्मेदारी को भी अलग ही अंदाज से निभाना शुरू किया। स्कूल में गर्मियों की छुट्टियों के दिनों में उन्होंने बच्चो के लिए स्कूल में स्काउट एवं गाइड की पाठशाला चलाई।

 विशिष्ट शैक्षिक प्रयास की प्रवृति वाले इस अध्यापक ने अपनी पदोन्नति से पूर्व प्राथमिक विद्यालय उडरी में अपने साथी अध्यापक कन्हैया सेमवाल के साथ हिन्दी व अंग्रेजी की राईम पुस्तिकाओं का वितरण कर कुछ नयी युक्तियों का प्रयोग किया।

पढाने के तौर-तरीकों में फेरबदलकर कर महंगी फीस वाले प्राईवेट स्कूलों की तर्ज पर ग्रेडिंग व स्टार देने की व्यवस्था बनाई। जो सामाजिक कार्यों, लेख, पढाई, सहयोग आदि मानकों के आधार पर तय की गई ।

ग्रेड व स्टार पाने को प्रयासरत बच्चों में सामाजिक मुद्दों के प्रति जिम्मेदारी व समझ विकसित होने के साथ ही उनमें सहयोग, बड़ों के प्रति सम्मान व प्रतियोगिता की भावना भी पैदा होने लगी। पढाई से बच्चे बोर न हों इसके लिये मॉडयूल व कठपुतली को भी माध्यम बनाया गया।

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