सुधरे हालात : शिक्षक ने सरकारी स्कूल का किया कायाकल्प, तीन गुना हो गए विद्यार्थी
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अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता इस कहावत को गलत साबित करके दिखाया पाटी विकासखंड के एक स्कूल में तैनात शिक्षक शंकर सिंह अधिकारी ने। कभी छात्रों की कमी से जूझ रहे राजकीय प्राथमिक विद्यालय गड्यूड़ा नवीन में वर्ष 2012 में उनकी तैनाती के बाद आज विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है।
स्थिति यह है कि बच्चों का दाखिला यहां कराने के लिए अभिभावकों में होड़ मचती है। निजी स्कूलों से भी छात्र यहां एडमिशन ले रहे हैं। 2012 में गड्यूड़ा नवीन प्राथमिक विद्यालय में कुल 22 छात्र थे, लेकिन आज यहां 64 विद्यार्थी पढ़ते हैं। शिक्षक शंकर सिंह अधिकारी ने इस सत्र में अपने बेटे स्वप्निल को गड्यूड़ा के प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश दिलाया है। करीब सात वर्ष तक वह अकेले ही बच्चों को पढ़ाते रहे।
छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए उन्होंने अपने खर्चे पर दो शिक्षकों की तैनाती की है। साथ ही सभी विद्यार्थियों को लेखन सामग्री, 53 छात्रों को ब्लेजर, जूते और मौजा आदि दिए।
इसके अलावा स्वच्छता के लिए जैविक-अजैविक कूड़ेदानों का निर्माण, ढाई हजार लीटर क्षमता का बरसाती जल संग्रहण टैंक निर्माण, एमडीएम के लिए वाशिंग प्वाइंट, सांस्कृतिक मंच, विद्यालय की सुरक्षा दीवार, खेल मैदान का चौड़ीकरण, मुख्य गेट का निर्माण करवाया। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सतीश भट्ट का कहना है कि उनकी इस पहल से छात्र संख्या बढ़ने के साथ ही शैक्षिक गुणवत्ता भी सुधरी है।
स्कूल के प्रति समर्पण भाव और स्कूली गतिविधियों के चलते विद्यालय को स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ एसएमसी पुरस्कार मिल चुका है। स्कूल में लैपटॉप के जरिए सायंकालीन कक्षाओं का संचालन भी किया जा रहा है। शिक्षक शंकर सिंह अधिकारी की पत्नी सरस्वती अधिकारी भी शिक्षिका हैं और बाराकोट ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय वल्सों में उनकी तैनाती है।
गड्यूड़ा नवीन प्राथमिक विद्यालय का शैक्षिक स्तर बेहतरीन है। विभागीय पहल के अलावा विद्यालय के शिक्षक शंकर सिंह अधिकारी के खुद के प्रयासों से शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार है।
- सत्यनारायण, जिला शिक्षाधिकारी, चंपावत