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बच्चों की प्यास बुझाने को 'भगीरथ' बन गए गुरूजी

Mon, 06 Apr 2015 12:31 PM IST
नरेश थपलियाल/ अमर उजाला, कोटद्वार
नरेश थपलियाल/ अमर उजाला, कोटद्वार Updated Mon, 06 Apr 2015 12:31 PM IST
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teacher arrange water for student in kotdwar.

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में प्राथमिक स्कूल के शिक्षक अपने छात्रों के लिए 'भगीरथ' बन गए।

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पानी के लिए तरस रहे बच्चों की तकलीफ दूर करने के लिए शिक्षकों ने स्कूल तक पानी पहुंचाकर दम लिया। सरकारी उपेक्षा से निराश शिक्षकों ने इस कार्य में ग्रामीणों की मदद ली।

कोटद्वार के बौंसालधार वर्ष 2010 में प्राइमरी स्कूल की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। जल संस्थान से शिकायत की गई पर काम नहीं हुआ। 2011 में बौंसाल क्षेत्र में बची हुई पाइप लाइन भी मलबे में दब गई। हर ओर से मायूस होकर शिक्षकों ने खुद प्रयास शुरू किए।

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अपने स्तर पर सबने की मदद

teacher arrange water for student in kotdwar.

पिछले महीने प्रधानाध्यापिका सरिता घनशाला और सहायक अध्यापक अनिल बिष्ट ने कोटद्वार के कुछ व्यापारियों से इस काम में मदद की अपील की थी।

व्यापारी हीरामणि मैंदोला और रवि बिष्ट ने 50 पाइपों की व्यवस्था की। शिक्षकों के आह्वान पर 40 ग्रामीणों ने श्रमदान करके स्कूल तक पाइप बिछाई जिससे 3 अप्रैल को पानी पहुंच गया।

41 साल दुर्गम में, एक भी मेडिकल लीव नहीं

कोटद्वार निवासी खुशीराम डबराल ने अपनी पूरी पेशेवर जिंदगी दुर्गम विद्यालयों में ही काट दी। 41 साल में एक भी मेडिकल लीव नहीं ली। सेवानिवृत्त होने पर देवीखेत के आठ गांवों के लोगों ने ढोल-दमाऊं के साथ सम्मान सहित उन्हें उनके कोटद्वार पदमपुर घर तक छोड़कर कृतज्ञता जताई।

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