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इस भाई के जज्बे को सलाम, चाय बेचकर छोटे भाई को दिलाया मुकाम

Sun, 30 Apr 2017 08:35 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 30 Apr 2017 08:35 AM IST
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tea sealer brother teach younger brother
ankit jain - फोटो : amar ujala

बचपन में दोनों भाई के सिर से पिता का साया उठ गया। ऐसी घड़ी में सारी जिम्मेदारी सिर पर आने से बड़े भाई अमित की पढ़ाई तो छूट गई, लेकिन उन्होंने छोटे भाई को पढ़ाने का फैसला किया।

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छोटी सी उम्र से ही खुद चाय की दुकान चलाकर अमित ने अंकित को पढ़ाया। इसे अमित का भाई के प्रति प्रेम और अंकित का हौसला ही कहेंगे कि उसने ऑल इंडिया 2205 रैंक के साथ जेईई मेंस क्वालिफाई कर लिया। अब उनका सपना कामयाब इंजीनियर बनने का है।
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पिता की मौत के समय बड़े भाई अमित जैन भी पांचवीं क्लास में थे। परिवार पर अचानक टूटे इस पहाड़ से उबरने के लिए अमित ने पढ़ाई बीच में छोड़कर पिता की चाय की दुकान संभाल ली। हालांकि, अमित को यह गवारा न था कि उनका छोटा भाई भी चाय की दुकान चलाए।

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हालात से समझौता नहीं करने की ठानी 

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क‌िताबें - फोटो : अमर उजाला

अंकित ने भी मन में ठान ली कि हालात से समझौता नहीं करेंगे। राह में जो मुश्किलें खड़ी थीं, उन्हें ही जीत का जरिया बना लिया। एसजीआरआर तालाब से 96 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं उत्तीर्ण करने वाले अंकित मुफलिसी से लड़कर इस मुकाम तक पहुंचे हैं। जिसमें उनके खेवनहार बने बड़े भाई अमित। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने पढ़ाई छोड़ बैंड बाजार में चाय की दुकान चलानी शुरू की।

इसी कमाई से घर चलाया और भाई को अच्छी शिक्षा दी। शायद इसलिए कि पढ़ाई का मोल वह जानते थे। उनकी इस तपस्या का ही फल है कि अंकित ने खुद को श्रेष्ठ में सर्वश्रेष्ठ साबित किया। सीमित संसाधनों ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि लड़ते रहने का जज्बा दिया। गत वर्ष उनके जेईई मेंस में 150 नंबर थे, लेकिन अच्छा कॉलेज नहीं मिला। मन में ठानी और इस बार 251 अंक हासिल किए।

भाई अमित अपना सपना उनकी आंखों में सच होता देख रहे हैं। तमन्ना बस यही कि मुफलिसी के दौर में जो वह न कर सके, अब भाई कर दिखाए। अंकित के शिक्षक एवं अविरल क्लासेज के निदेशक डीके मिश्रा का कहना है कि अंकित की गंभीरता और विषयों पर उसकी पकड़ ने यह मुकाम दिलाया है। निश्चित तौर पर जेईई एडवांस में भी अंकित नाम रोशन करेगा।

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