उत्तराखंडः पहाड़ में 'जम' गए टैक्सियों के पहिए
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टैक्सी-मैक्सी स्वामियों और चालकों के अपने फैसले पर अडिग रहने से बुधवार से उत्तराखंड के पहाड़ में टैक्सियों के पहिए अनिश्चतकाल के लिए थम जाएंगे।
सरकारी विभागों में अनुबंध पर चलने वाली टैक्सियों का संचालन भी ठप रहेगा। प्रशासन की ओर से हड़ताल से निबटने को अभी तक कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए हैं।
आवश्यक सेवाओं के वाहन चलेंगे
कर्णप्रयाग में उत्तराखंड टैक्सी/मैक्सी पर्वतीय महासंघ के जिलाध्यक्ष डॉ. एमएम नवनी का कहना है कि सरकार द्वारा पर्वतीय टैक्सी-मैक्सी वाहन चालकों के साथ सौतेला व्यवहार होने से चालकों ने हड़ताल का निर्णय लिया है। इस दौरान केवल आवश्यक सेवाओं के वाहन चलेंगे।
स्कूली बच्चों पर भारी पड़ सकती हड़ताल
बुधवार से टैक्सी-मैक्सी वाहन मालिक एवं चालकों की बेमियादी हड़ताल से जिले के अधिकांश स्कूलों में ताले लटकने की आशंका है।
उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से संचालित होने वाली तीन टैक्सी यूनियनों के करीब 1500 वाहन ऋषिकेश, देहरादून, भटवाड़ी, डुंडा तथा लंबगांव क्षेत्र में संचालित होते हैं, लेकिन बुधवार से हड़ताल के इन सभी वाहनों के पहिए जाम हो जाएंगे।
बेमियादी हड़ताल स्थानीय लोगों के साथ ही स्कूली बच्चों पर भी भारी पड़ सकती है। जिले के दूर-दराज क्षेत्र के अधिकांश स्कूलों में तैनात शिक्षक जिला मुख्यालय से टैक्सियों से रोजाना स्कूल आते-जाते हैं।
डीएम सी रविशंकर ने बताया कि फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। लोग दैनिक बस सेवाओं से आवाजाही कर सकते हैं।
ये है प्रमुख मांगें
- मैक्सी/कैब वाहनों की सीटिंग क्षमता पूर्व की भॉति रखी जाए।
- बिना ग्रीन कार्ड वाहन धारकों का भी टैक्स माफ किया जाए।
- लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया को सरल किया जाए।
- वाहनों की उम्र मैदानी क्षेत्रों की भांति 15 वर्ष की जाए।
- हर जिले में चालक प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएं।
- जून 2013 की आपदा के दौरान यात्रियों को छोड़ने में लगाए गए वाहनों के किराए का भुगतान किया जाए।