जीएसटी चोरी में रुद्रपुर और काशीपुर जोन की 17 फर्मों में छापेमारी, 5 करोड़ की कर चोरी पकड़ी
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राज्य कर विभाग की 14 टीमों ने जीएसीटी चोरी कर रहे ईंट भट्टा व्यवसायियों के प्रतिष्ठानों में छापेमारी करके 5.10 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी। एक ईंट कारोबारी का प्रतिष्ठान बंद मिला।
अधिकारियों की माने तो छापेमारी के दौरान तीन लाख रुपये का टैक्स तुरंत जमा कर दिया गया है। विभाग ने कारोबारियों को जीएसटी जमा करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी है। विभाग इन कारोबारियों पर काफी दिन से नजर रखे हुए थे।
रुद्रपुर और काशीपुर जोन के ईंट और स्क्रैप का कारोबार करने वाले 17 कारोबारी जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से ही जीएसटी रिटर्न और टैक्स जमा नहीं कर रहे थे। कारोबारी ई-वे बिल से खरीद और बिक्री कर रहे थे।
रुद्रपुर जोन में 29 करोड़ रुपये के टर्नओवर पर चार करोड़ 10 लाख की जीएसटी की चोरी की जा रही थी, जबकि काशीपुर जोन में 15 करोड़ के टर्नओवर पर एक करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की जा रही थी।
जीएसटी कमिश्नर सौजन्या के निर्देश पर बृहस्पतिवार को वस्तु एवं सेवा कर विभाग की विशेष टीम ने छापेमारी की। छापे की कार्रवाई अपर आयुक्त काशीपुर बीएस नगन्याल, अपर आयुक्त रुद्रपुर अनिल सिंह और संयुक्त आयुक्त हल्द्वानी पीएस डुंगरियाल के निर्देशन में अंजाम दी गई।
छापेमारी को 47 अधिकारियों की 14 टीमों ने अंजाम दिया। अपर आयुक्त बीएस नगन्याल ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद से ईंट और स्क्रैब के 17 कारोबारी लगातार रिटर्न-3बी व देय टैक्स जमा नहीं कर रहे थे। डिप्टी कमिश्नर एसटीएफ रजनीश यशवस्थी के नेतृत्व में छह टीमों ने किच्छा, सितारगंज, नानकमत्ता, झनकट, खटीमा और रुद्रपुर में पांच ईंट और स्क्रैप के एक कारोबारी के प्रतिष्ठान पर छापेमारी की।
इनमें से नानकमत्ता के ईंट कारोबारी का प्रतिष्ठान बंद मिला, जबकि अन्य प्रतिष्ठानों में जांच की गई। शाम को अपने कार्यालय में डिप्टी कमिश्नर रजनीश ने बताया कि रुद्रपुर के स्क्रैप व्यापारी ने तीन लाख रुपये जमा कराए हैं। बताया कि सभी कारोबारियों को 15 दिन में जीएसटी जमा करने का समय दिया गया है। मालूम हो कि बीते चार दिसंबर को 19 प्रतिष्ठानों में की गई कार्रवाई के बाद 10 करोड़ रुपये से अधिक जीएसटी के रूप में जमा हो चुके हैं। इधर, काशीपुर के दो, जसपुर के पांच और बाजपुर के चार ईंट भट्ठों पर सर्वे की कार्रवाई की गई।
जीएसटी लागू होने के बाद से निशाने पर थे
वस्तु एवं सेवा कर विभाग की नजर इन 17 कारोबारियों पर जीएसटी लागू होने के बाद से ही थी। इन कारोबारियों ने जीएसटी रिटर्न फार्म-3-बी और कर जमा नहीं किए थे। जीएसटी की टीम इन पर करीब पांच छह माह से नजर रख रही थी। सटीक सूचनाओं के बाद जीएसटी की 14 टीमों में शामिल 47 अधिकारियों की टीम ने कर चोरी पकड़ी। ये कारोबारी खुद ही जाल में फंस गए, दरअसल जीएसटी लागू होने से पहले ये 17 करोबारी बराबर टैक्स देते रहे। जीएसटी लागू होने के बाद इन कारोबारियों ने टैक्स देना बंद कर दिया। इसी कारण जीएसटी की टीम इनके प्रतिष्ठानों पर नजर रखने लगी थी।
टीम में ये अधिकारी रहे शामिल
डिप्टी कमिश्नर तारकेश्वर मिश्रा, मोहिता भंडारी, अरविंद प्रताप सिंह, आरएल वर्मा, नीरज कुमार, ठाकुर रणवीर तथा असिस्टेंट कमिश्नर अजय बिरथरे, संतोश सिंह, हेमलता शुक्ला एसएस यादव, भुवन पांडे, अनिल सिन्हा, शुचि तिवारी के अलावा एसटीओ अशोक कुमार, अशोक गर्ब्याल, केदार दास्पा, मो. यासिर, पीसी जोशी, संदीप अरोरा, नंदन गिरी समेत 47 अधिकारी शामिल थे।