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Dehradun News: छावनी बनी काठबंगला बस्ती, एमडीडीए ने अवैध 26 मकानों को किया ध्वस्त

Tue, 25 Jun 2024 05:12 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jun 2024 05:12 AM IST
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Taking action against illegal encroachments in Kathbangla
Iभारी विरोध के बीच पांच घंटे तक गरजती रही जेसीबी, संगठनों-लोगों का विरोध नहीं रोक पाया कार्रवाईI
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एमडीडीए ने रिस्पना नदी किनारे काठबंगला बस्ती में अवैध कब्जों पर कार्रवाई कर जेसीबी से 26 मकान ध्वस्त कर दिए। इस दौरान बस्ती छावनी में तब्दील रही। भारी पुलिस बल के चलते विभिन्न संगठनों और लोगों का विरोध कार्रवाई को नहीं रोक पाया। करीब पांच घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान रोते-बिलखते और गुस्से का इजहार करते लोग कभी एमडीडीए तो कभी सरकार पर सवाल उठाते रहे। अधिकारी जांच के आधार पर तैयार की गई सूची का हवाला देते रहे तो लोग कार्रवाई में भेदभाव का आरोप लगाते रहे।



पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को एमडीडीए के अधिकारी सुबह करीब 10 बजे आधा दर्जन जेसीबी और बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवानों के साथ लेकर कैनाल रोड पर रिस्पना नदी किनारे स्थित काठबंगला बस्ती पहुंचे। जैसे ही ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर धूल उड़ाती हुई एक के बाद एक जेसीबी पहुंची तो लोग दहशत में आ गए। विभिन्न राजनीतिक संगठन के कार्यकर्ता और बस्ती के लोग जेसीबी के सामने खड़े हो गए। इन्होंने लोगों के पास मौजूद भवनाें के वैध होने के कागजात देखने और समय दिए जाने की मांग की, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि जांच के बाद ही सूची तैयार की गई है। इसलिए अब कोई समय नहीं दिया जाएगा।
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इसके बाद पुलिस फोर्स ने मोर्चा संभाला और जेसीबी ने अपना काम शुरू कर दिया। एक-एक कर शाम तीन बजे तक 26 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान हर तरफ रोते-बिलखते बेघर हुए लोग कभी आक्रोश दिखाते तो कभी गुहार लगाते दिखे। बताया जा रहा है कि अभी 100 से अधिक मकानों पर कार्रवाई बाकी है।
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एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि अधिकारियों को अवैध भवनों को ही ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई पूरी होने तक अभियान अगले दो-तीन दिन जारी रहेगा।





Iघर नहीं आंखों के सामने टूट रहे थे सपनेI



पाई-पाई जोड़कर नदी किनारे सरकारी जमीन पर आशियाने बना तो दिए, लेकिन जब कार्रवाई के दौरान घर गिरने लगे तो ऐसा लगा मानो उनके घर नहीं, बल्कि खुली आंखों के सामने उनके सपने टूट रहे हों। किसी ने मेहनत मजदूरी कर तो किसी ने दूसरों के घरों में चूल्हा-चौका कर एक-एक ईंट जोड़ी थी।



सोमवार का दिन मलिन बस्ती के लोगों के लिए भारी रहा। यहां अवैध रूप से रह रहे सैकड़ाें लोग सालों से पाई-पाई इकट्ठा कर ईंटों को जोड़ते रहे। यह भी ख्याल नहीं रखा कि जब कभी सरकार उनके कब्जे हटाएगी तो क्या होगा। आखिरकार वही हुआ, जिसका इन लोगों को डर सता रहा था। सीता देवी का मकान टूटा तो वह सहन नहीं कर पाईं। रोती बिलखती सीता देवी का कहना था कि उसने सालों से दूसरों के घरों में बर्तन मांझकर पैसे जोड़े और किसी तरह यह मकान खड़ा किया। तब किसी ने नहीं कहा कि उन्हें उजाड़ दिया जाएगा। अब अचानक उनकी छत छीन ली गई तो वे कहां जाएंगे।


इसी तरह रीना का भी कहना था कि हमें पता होता कि इस तरह से उनके मकान तोड़े जाएंगे तो वे इसमें गाढ़ी कमाई को नहीं लगाते। कुछ इसी तरह अन्य लोग भी कभी एमडीडीए तो कभी सरकार को कोसते नजर आए।
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