स्वामी स्वरूपानंद का बड़ा बयान, मुस्लिमों में निकाह को लेकर कह दी बड़ी बात
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शारदा एवं ज्योर्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मुस्लिम धर्म में होने वाले विवाह को अनुबंध बताया। उन्होंने कहा कि यह निकाह मुस्लिम महिलाओं के हित में नहीं है। इसमें बदलाव होना चाहिए।
पंजाब के प्रवास के बाद हरिद्वार लौटे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कनखल स्थित मठ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। शंकराचार्य ने तीन तलाक पर हो रही देशव्यापी बहस पर कहा कि मुस्लिमों में हिंदू रीतियों के तरह विवाह नहीं बल्कि अनुबंध होता है। अनुबंध करने के तहत लड़का पक्ष से लड़की को दीनार दी जाती है।
ये निकाह मुस्लिम धर्म की महिलाओं के हित में नहीं होता। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के हित में विवाह के नियमों को बदलने की सलाह देते हुए बहुविवाह को भी घातक बताया।
संतो को विवादों से रहना चाहिए दूर
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म की यदि कोई महिला बच्चे पैदा करने में अक्षम होती है या किसी अन्य कारण के पुरुष को दूसरी महिला से शादी करनी पड़ जाए तो पहले कानूनन तरीके से पहली पत्नी से संबंध विच्छेद करना पड़ता है।
जबकि मुस्लिम धर्म का कोई भी व्यक्ति एक पत्नी के होते हुए हुए कई पत्नियां रख सकता है। उन्होंने बहुविवाह को आबादी संतुलन के लिए घातक बताया। कहा कि बच्चे पैदा करने या विवाह के लिए कानून बनना चाहिए।
उन्होंने ऐसे लोगों का भी विरोध किया जो चर्चाओं में आने के लिए अधिक बच्चे पैदा करने की बात करते हैं। उनके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद में किसी कथित शंकराचार्य ने महिलाओं को 10-10 बच्चे पैदा करने की सलाह दी तो महिलाओं ने उसका कड़ा विरोध किया।
बोले कि चर्चाओं में आने के लिए कोई कहता है कि हिंदुओं को कुरान पढ़नी चाहिए और दुनिया का सबसे पवित्र ग्रंथ बताते हैं। उन्होंने संतों को इस प्रकार के विवादों से दूर रहने को सलाह दी।