स्वामी शिवानंद ने एनजीटी से की एफआरआई को ब्लैकलिस्ट करने की मांग, पढ़ें क्या है पूरा मामला
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने एफआरआई (फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट) की ओर से गंगा में पत्थर आने के संदर्भ में एनजीटी को भेजी गई रिपोर्ट पर प्रश्नचिह्न लगाया है। उन्होंने रिपोर्ट को गलत बताते हुए एनजीटी से एफआरआई को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती मंगलवार को मातृदसन में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एनजीटी ने विगत जून में एफआरआई को सात स्थानों (बिशनपुर, भोगपुर, श्यामपुर, रवासन एक और दो, चिड़ियापुर, कोटावाली) में सर्वे करके यह जांचने के लिए कहा था कि गंगा में पत्थर ऊपर पहाड़ों से बहकर आता है या नहीं।
एफआरआई ने रवासन एक, दो और कोटावाली पर किए गए सर्वे की रिपोर्ट एनजीटी को भेजी। रिपोर्ट में बताया गया कि पत्थर ऊपर से ही आता है। स्वामी शिवानंद ने एफआरआई की रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि इस प्रकार का सर्वे मानसून से पहले और मानसून के बाद किया जाता है।
एडीएम और एसडीएम पर लगाया आरोप
जिसके लिए मानसून से पहले गड्ढा खोदा जाता है और मानसून के बाद देखा जाता है कि उसमें पानी के साथ बहकर पत्थर आए या नहीं। उन्होंने कहा कि जून में जब एनजीटी ने आदेश किया तो बारिश का मौसम था, तो उस वक्त एफआरआई ने सर्वे किस प्रकार किया। उन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्ट स्वीकार्य नहीं है और एनजीटी से एफआरआई पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
स्वामी शिवानंद ने कहा कि 24 नवंबर को वह किसी काम से दिल्ली गए हुए थे और उनकी गैरहाजरी में एडीएम और एसडीएम ने मातृसदन पहुंचकर गंगा की रक्षा के लिए अनशनरत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद से वार्ता की। उन्होंने आरोप लगाया कि एडीएम और एसडीएम ने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद पर अनशन समाप्त करने के लिए दबाव बनाया।