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गंगा में हो रहे खनन के खिलाफ शिवानंद ने शुरू किया अनशन
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 28 Nov 2016 08:38 AM IST
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स्वामी शिवानंद
- फोटो : AmarUjala
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खनन के खिलाफ आंदोलन कर रहे मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने 23 दिन पुराना अनशन खत्म कर दिया है। अब परमाध्यक्ष शिवानंद ने अनशन शुरू कर किया है।
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इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा आत्मबोधानंद के अनशन के दौरान भी जमकर खनन होने से यह साफ हो गया है कि प्रशासन कार्रवाई नहीं करेगा। ऐसे में वह निगमानंद के बाद अपने एक और शिष्य की हत्या नहीं होने देंगे और खुद ही प्राणोत्सर्ग करेंगे। इच्छा मृत्यु के संबंध में राष्ट्रपति सहित अन्य माननीयों को भेजी गई चिट्ठी में सात दिन की अवधि पूरी होने पर दो दिसंबर से शरीर त्यागने के लिए जल भी त्याग देंगे।
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गंगा में खनन पर रोक और क्रशरों पर कार्रवाई सहित पांच बिंदुओं को लेकर मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद पिछले 23 दिन से अनशन कर रहे थे। रविवार को स्वामी शिवानंद ने पत्रकार वार्ता में कहा कि आत्मबोधानंद के अनशन के दौरान न सिर्फ गंगा में अवैध खनन जारी रहा, बल्कि रायवाला से भोगपुर तक खनन को खुली छूट दे दी गई।
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वहीं पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को लगातार फोन कॉल और मैसेज भेजकर खनन की लोकेशन सहित पूरी जानकारी दी गई। लेकिन एक भी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट हो जाता है कि खनन माफिया को शासन प्रशासन का पूरा संरक्षण है। वहीं प्रशासन का फोकस खनन रोकने के बजाय इस साजिश पर है कि निगमानंद की तरह आत्मबोधानंद को उठाकर अस्पताल में कैसे भर्ती कराया जाए।
इसलिए वह स्वामी निगमानंद के तरह अपने दूसरे शिष्य की हत्या नहीं होने देंगे। स्वामी शिवानंद ने बताया कि आत्मबोधानंद अनशन को विराम देने के लिए तैयार नहीं थे, उन्हें मनाकर खुद संयम व्रत शुरू करने का फैसला लिया गया। जिसके तहत अन्न छोड़ दिया गया है।
इच्छा मृत्यु के संबंध में भेजी गई चिट्ठी राष्ट्रपति, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और उत्तराखंड के राज्यपाल को 25 नवंबर को रिसीव हो गई है। जबकि प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस ऑफ उत्तराखंड को यह चिट्ठी 26 नवंबर को मिल गई है। सात दिन के समय के अनुसार दो दिसंबर तक कोई जवाब न मिलने पर इच्छा मृत्यु के लिए मौन स्वीकृति मानकर जल भी छोड़ दिया जाएगा।
अधिकारियों की आश्रम में एंट्री बंद
स्वामी शिवानंद ने कहा कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के 23 दिन के अनशन में प्रशासन ने सकारात्मक वार्ता की पहल ही नहीं की। पुलिस और प्रशासन एक-दो ट्रैक्टर ट्राली तो पकड़ता है, लेकिन जहां खनन सामग्री ले जाई जाती है, वहां जाने की इजाजत उन्हें नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि अनशन के दौरान वह अब मोबाइल पर भी किसी से बात नहीं करेंगे। पुलिस या प्रशासन का कोई अधिकारी मातृसदन आता है तो उसे आश्रम के भीतर नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने मैसेज के प्रिंट आउट दिखाते हुए बताया कि 30 अक्तूबर से 27 नवंबर तक 42 मैसेज खनन की शिकायत के संबंध में भेजे गए, पर किसी पर कार्रवाई नहीं हुई।
हरीश रावत के बयान पर पलटवार
गंगा में खनन खोलने को लेकर मातृसदन प्रदेश सरकार पर हमलावर है। स्वामी शिवानंद ने मुख्यमंत्री हरीश रावत के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें कि सीएम ने खुद को नॉट आउट बैट्समैन बताया। उन्होंने कहा कि हरीश रावत बताएं कि अल्मोड़ा से जनता ने कितनी बार आउट किया है। एक बार हरिद्वार की जनता को धोखा देने के बाद उनकी पत्नी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार खनन करने और क्रशर वालों पर मेहरबान है। एक लाख का जुर्माना घटाकर 10 हजार कर दिया गया। क्रशरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेश भी दरकिनार किए जा रहे हैं।