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स्वामी सानंद ही नहीं ये दो संत भी गंगा के लिए त्याग चुके अपने प्राण, नहीं उठ सका मौत के राज से पर्दा

Fri, 12 Oct 2018 09:11 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 12 Oct 2018 09:11 AM IST
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Swami sanand and two other saints death for ganga  protection in uttarakhand  
स्वामी सानंद से पहले गंगा रक्षा के लिए प्राण त्यागने वाले स्वामी निगमानंद

वर्ष 1998 में कनखल थाना क्षेत्र के जगजीतपुर गांव में गंगा के किनारे स्थापित की गई मातृसदन संस्था गंगा के लिए बलिदान करने वालों की भूमि बन गई है। वैसे तो स्वामी सानंद से पूर्व इस संस्था के दो ब्रह्मचारी अपना बलिदान दे चुके हैं।

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इनमें से निगमानंद का बलिदान तो विशुद्ध रूप से गंगा के लिए ही था। मातृसदन के अनुयायी आगे भी गंगा पर बलिदान होने के लिए खुद को तत्पर बता रहे हैं। 
मातृसदन संस्था के संतों ने जब ध्वनि प्रदूषण और गंगा में अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग को लेकर संघर्ष शुरू किया तो पहले स्थानीय निवासियों के और उसके बाद खनन माफिया के निशाने पर आ गए थे।
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कईं बार इन संतों पर हमले भी किए गए, लेकिन उन्होंने गंगा की रक्षा के लिए अपना संघर्ष नहीं त्यागी। वर्ष 2003 में आश्रम में स्वामी गोकुलानंद नैनीताल जनपद के एक गांव के पास जंगल में मृत अवस्था में पड़े मिले थे। इसके बाद करीब 78 दिनों तक गंगा में खनन पर रोक लगाने की मांग को लेकर अनशन करते हुए ब्रह्मचारी निगमानंद सरस्वती का 13 जून 2011 में देहरादून स्थित जौलीग्रांट अस्पताल में देहावसान हो गया था।
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इस बीच स्वामी सानंद ने भी 112 दिन तक अनशन करते हुए खुद को गंगा के प्रति समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने संघर्ष के लिए मातृसदन का ही परिसर चुना और यहां के संघर्ष और बलिदान की परंपरा को आगे बढ़ाया। मातृसदन के परमाध्यक्ष शिवानंद सरस्वती का कहना है कि मातृसदन गंगा के लिए कोई भी बलिदान देने को तत्पर है।

निगमानंद की मौत से भी नहीं उठ सका पर्दा

गंगा रक्षा की खातिर बलिदान दे चुके मातृसदन के युवा संत निगमानंद की मौत का मामला सात साल बाद भी नहीं खुल पाया है।। सीबीआई केस में एक बार क्लोजर रिपोर्ट भी लगा चुकी है। हालांकि कोर्ट के फिर से सीबीआई जांच कराने के आदेश राज्य सरकार को दिए हैं, लेकिन राज्य सरकार इस आदेशों पर कुंडली मारे बैठी है।

वर्ष 2011 में गंगा रक्षा के लिए आंदोलनरत मातृसदन के युवा संत की जौलीग्रांट अस्पताल में मौत हुई थी। संस्था के परमाध्यक्ष शिवानंद सरस्वती ने जिला अस्पताल एवं जौलीग्रांट अस्पताल के चिकित्सकों पर जहर देकर निगमानंद की हत्या कर देने का आरोप जड़ा था। तब मातृसदन के परमाध्यक्ष की तरफ से निगमानंद की हत्या का केस भी दर्ज हुआ था।

सीबीआई भी कई बार जांच के लिए हरिद्वार पहुंची और तथ्य जुटाए। हालांकि माह बाद ही सीबीआई ने संत निगमानंद की मौत के मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। क्लोजर रिपोर्ट के बाद संस्था के परमाध्यक्ष ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब कोर्ट ने सीबीआई को फिर से निगमानंद के केस की जांच के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक भी सीबीआई ने केस को हाथ में नहीं लिया।

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