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स्वच्छ भारत अभियान: लाखों रुपयों पर ग्रामीणों ने ऐसे लगाया पलीता, शौचालयों में भर दिए उपले और भूसा, खोली दुकान

Thu, 08 Oct 2020 05:29 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्यामपुर (हरिद्वार)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्यामपुर (हरिद्वार) Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 08 Oct 2020 05:29 PM IST
सार

  • स्वच्छ भारत अभियान को श्यामपुर क्षेत्र के गांवों में लग रहा पलीता
  • लाखों खर्च कर गंगा किनारे गांवों में घर घर बनवाए गए थे शौचालय

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Swachh Bharat Abhiyan: Villagers Puted Upale and husk in Toilet in Haridwar
शौचालय में भूसा और उपले - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र में केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान और नमामि गंगे योजना के तहत लाखों रुपये खर्च कर शौचालय बनवाए, लेकिन लोगों ने उनका इस्तेमाल शौच करने के बजाए भूसा और उपले रखने के साथ ही दुकान खोलने में कर लिया है। जबकि शौच के लिए यहां के लोग अभी भी खुले में ही जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकारी दस्तावेजों में यह गांव खुले में शौच से मुक्त दर्शाए गए हैं।

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केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत अभियान योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण के लिए बारह हजार रुपये का अनुदान प्रत्येक गरीब परिवार को दिया गया था। स्वजल विभाग के माध्यम से गंगा किनारे के गांवों में शौचालय बनाने का विशेष अभियान चलाया गया।
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स्वच्छ भारत अभियान के साथ नमामि गंगे योजना में भी बजट उपलब्ध कराया गया। सरकार की इस सबके बीच यह मंशा थी कि हर गांव को खुले में शौच करने से मुक्त किया जाए। जानकारी के अनुसार 2017 में ग्रामीण क्षेत्र में शौचालय बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया था।
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हालांकि तब कई ग्रामीणों ने यह आरोप लगाया था कि इस योजना के तहत उनके यहां शौचालय बने ही नहीं। वहीं श्यामपुर क्षेत्र के श्यामपुर, कांगड़ी, गाजीवाली, सजनपुर, पीली पड़ाव आदि गांवों में इन शौचालयों की दूसरी तस्वीर ही निकलकर सामने आ रही है। 

ग्राम प्रधान भी हैं परेशान

यहां लोग अब भी खुले में शौच को जा रहे हैं। जबकि घर में बने शौचालय का इस्तेमाल इन्होंने भूसा और उपले रखने में कर लिया है। कुछ परिवारों ने शौचालय बंद कर उनमें छोटी दुकान खोल ली है।

ग्राम प्रधान राजेश कुमार, शकुंतला चौहान, मेनका रानी आदि का कहना है कि ग्रामीणों को गंगा किनारे खुले में शौच करने के लिए मना किया गया। उनको शौचालय के प्रयोग करने के फायदे भी बताए गए। इसके बाद भी ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हैं। इन पंचायत प्रतिनिधियों को कहना है कि अब जिला प्रशासन को ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

अभी तक इस तरह का कोई मामला प्रशासन के संज्ञान में नहीं था। इसकी जांच करवाई जाएगी। पहले ग्रामीणों को समझाया जाएगा। यदि इसके बाद भी घर में बने शौचालयों का प्रयोग नहीं करेंगे तो जुुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
- सी रविशंकर, जिलाधिकारी हरिद्वार

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