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जेएनयू की इस छात्रा ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान, अब वैज्ञानिक बनने को है तैयार
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा
Updated Fri, 10 Mar 2017 09:06 AM IST
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- फोटो : file photo
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मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली जेएनयू की इस छात्रा ने उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। चौखुटिया की रहने वाली उत्तराखंड की एक बेटी अब वैज्ञानिक बनने को तैयार है। इसके लिए उसका इसरो में चयन हो गया है।
बात हो रही है जेएनयू दिल्ली से एमटेक कर रहीं सुनीता आर्या की। चौखुटिया अंतर्गत बरलगांव निवासी सुनीता आर्या पुत्री मोहन राम वैज्ञानिक बनेंगी। उनका चयन भारतीय विज्ञान अनुसंधान केंद्र (इसरो) के लिए हुआ है। सुनीता ने जूनियर तक की शिक्षा चौखुटिया के बोनाफाइड पब्लिक स्कूल में ग्रहण की।
इंटर जवाहर नवोदय विद्यालय ताड़ीखेत से किया। बीटेक कुमाऊं इंजीनियरिंग कालेज द्वाराहाट से किया। वर्तमान में वह जेएनयू दिल्ली से एमटेक कर रही हैं। सुनीता ने बताया कि इसरो की कुल 44 सीटों के लिए लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार हुआ था जिसमें उनका चयन हुआ है।
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सुनीता ने दिल्ली से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि बचपन में उनका वैज्ञानिक बनने का कोई इरादा नही था, परंतु बाद में देश के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा के चलते उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान करने की ठान ली। इसी के चलते इसरो की राह पकड़ी है। कहा कि वे अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ ही बोनाफाइड स्कूल के शिक्षकों को देती हैं जिनके बताए मार्ग पर चलकर उन्होंने ये मुकाम हासिल किया है।
सम्मान में होगा कार्यक्रम
सुनीता की उपलब्धि पर बोनाफाइड स्कूल के सभी शिक्षकों के साथ ही प्रबंधक पुष्कर कांडपाल ने भी खुशी जताई है। कहा कि सुनिता और उनके माता-पिता के सम्मान में शीघ्र ही एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। सुनीता के पिता मोहन राम सेना से सेवानिवृत्त हैं जबकि माता जमुना देवी गृहणी हैं।
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बात हो रही है जेएनयू दिल्ली से एमटेक कर रहीं सुनीता आर्या की। चौखुटिया अंतर्गत बरलगांव निवासी सुनीता आर्या पुत्री मोहन राम वैज्ञानिक बनेंगी। उनका चयन भारतीय विज्ञान अनुसंधान केंद्र (इसरो) के लिए हुआ है। सुनीता ने जूनियर तक की शिक्षा चौखुटिया के बोनाफाइड पब्लिक स्कूल में ग्रहण की।
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इंटर जवाहर नवोदय विद्यालय ताड़ीखेत से किया। बीटेक कुमाऊं इंजीनियरिंग कालेज द्वाराहाट से किया। वर्तमान में वह जेएनयू दिल्ली से एमटेक कर रही हैं। सुनीता ने बताया कि इसरो की कुल 44 सीटों के लिए लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार हुआ था जिसमें उनका चयन हुआ है।
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सुनीता ने दिल्ली से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि बचपन में उनका वैज्ञानिक बनने का कोई इरादा नही था, परंतु बाद में देश के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा के चलते उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान करने की ठान ली। इसी के चलते इसरो की राह पकड़ी है। कहा कि वे अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ ही बोनाफाइड स्कूल के शिक्षकों को देती हैं जिनके बताए मार्ग पर चलकर उन्होंने ये मुकाम हासिल किया है।
सम्मान में होगा कार्यक्रम
सुनीता की उपलब्धि पर बोनाफाइड स्कूल के सभी शिक्षकों के साथ ही प्रबंधक पुष्कर कांडपाल ने भी खुशी जताई है। कहा कि सुनिता और उनके माता-पिता के सम्मान में शीघ्र ही एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। सुनीता के पिता मोहन राम सेना से सेवानिवृत्त हैं जबकि माता जमुना देवी गृहणी हैं।