उत्तराखंड के गन्ना किसानों को झटका, पाएंगे कम कीमत
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राज्य मंत्रिमंडल की बैठक प्रदेश के किसानों को उत्तर प्रदेश के बराबर गन्ना मूल्य देने का फैसला किया गया है। इस बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की उम्मीद लगाए प्रदेश के किसानों को सीधे-सीधे पांच रुपये प्रति क्विंटल का घाटा उठाना पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश ने मिल मालिकों के दबाव में इस साल गन्ने के मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं की। वहां इस साल भी पिछले साल की तरह 290 (अगेती प्रजाति) और 280 रुपये प्रति क्विंटल देने का फैसला किया गया है।
उत्तराखंड सरकार ने भी गन्ना मूल्य उत्तर प्रदेश के बराबर ही देने का फैसला किया है। इससे यहां के किसानों को भी 280 और 290 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने के दाम मिलेंगे। इससे पूर्व उत्तराखंड ने उत्तर प्रदेश के गन्ना मूल्य से पांच रुपया प्रति क्विंटल अधिक देने का फार्मूला अपनाया था।
इसी तर्ज पर बीते वर्ष उत्तराखंड में गन्ने का मूल्य 285 और 295 रुपये तय किया गया था। यूपी जितना दाम मिलने से उत्तराखंड के किसानों को पिछले साल की अपेक्षा गन्ने की दोनों प्रजातियों के पांच रुपये प्रति क्विंटल कम दाम मिलेंगे। फैसले से किसानों का गुस्सा भड़कने के आसार हैं।
किसानों पर बेरहम, मिल मालिकों पर करम
मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में चीनी मिलों को सहकारी बैंकों से ऋण उपलब्ध कराने और किसानों का बकाया भुगतान कराने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया है। इसमें अपर मुख्य सचिव व गन्ना विकास सचिव सदस्य होंगे। चौथा राज्य वित्त आयोग गठित करने के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। शीतकालीन चारधाम यात्रा के संचालन को मंजूरी मिल गई है।
किसान का भगवान ही मालिक है। गन्ना मूल्य के नाम पर सरकार छलावा कर रही है। उत्तराखंड में पहले से ही यूपी से ज्यादा गन्ना मूल्य मिलता है। यूपी के बराबर गन्ना मूल्य स्वीकार नहीं है।
-संजय चौधरी, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन।
कैबिनेट ने यूपी के बराबर गन्ना मूल्य देने का जो निर्णय लिया है यह किसानों को स्वीकार नहीं। इसका विरोध किया जाएगा। उत्तराखंड में पहले की तरह यूपी से ज्यादा गन्ना मूल्य मिलना चाहिए।
-महकार सिंह, जिलाध्यक्ष उत्तराखंड किसान मोर्चा।