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बोर्ड परीक्षा देने के लिए छात्र दो घंटे पहले पहुंचे स्कूल, अभिभावक परेशान
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 10वीं के छात्रों को गणित विषय के पेपर के लिए शनिवार को दो घंटे पहले परीक्षा केंद्र आना पड़ा। परेड ग्राउंड में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महारैली के लिए रूट डायवर्जन होने से अभिभावकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रधानमंत्री मोदी की महारैली के लिए यातायात व्यवस्था के प्रभावित होने से किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से परेड ग्राउंड के एक किलोमीटर के दायर के 45 स्कूलों को बंद किया गया था। लेकिन उन स्कूलों में बोर्ड की परीक्षा कराई जाएंगी। जिन्हें बोर्ड परीक्षा का केंद्र बनाया गया है। परीक्षा के लिए अभिभावकों ने दो घंटे पहले तो अपने बच्चों को स्कूल पहुंचा दिया। लेकिन दोपहर एक बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद बच्चों को घर लोने में भी अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रुट डायवर्जन होने और शहर के मुख्य मार्गों में लगे जाम से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रेसकोर्स निवासी अनिल गुप्ता ने बताया कि सुबह उन्होंने नौ बजे अपने बेटे को दून इंटरनेशनल स्कूल छोड़ा। लेकिन दोपहर एक बजे जब वह अपने बेटे को लेने स्कूल पहुंचे तो उन्हें घुम के और जाम में फंस के स्कूल पहुंचना पड़ा। ऐसा ही हाल डालनवाला निवासी अलका कुकरेती का रहा। उन्हें अपने बेटे को सेंट जोजेफ्स स्कूल से लाने और छोड़ने में परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं स्कूल संचालकों ने कहा कि तय समय में बोर्ड की परीक्षा कराई गई।
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प्रधानमंत्री मोदी की महारैली के लिए यातायात व्यवस्था के प्रभावित होने से किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से परेड ग्राउंड के एक किलोमीटर के दायर के 45 स्कूलों को बंद किया गया था। लेकिन उन स्कूलों में बोर्ड की परीक्षा कराई जाएंगी। जिन्हें बोर्ड परीक्षा का केंद्र बनाया गया है। परीक्षा के लिए अभिभावकों ने दो घंटे पहले तो अपने बच्चों को स्कूल पहुंचा दिया। लेकिन दोपहर एक बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद बच्चों को घर लोने में भी अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रुट डायवर्जन होने और शहर के मुख्य मार्गों में लगे जाम से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रेसकोर्स निवासी अनिल गुप्ता ने बताया कि सुबह उन्होंने नौ बजे अपने बेटे को दून इंटरनेशनल स्कूल छोड़ा। लेकिन दोपहर एक बजे जब वह अपने बेटे को लेने स्कूल पहुंचे तो उन्हें घुम के और जाम में फंस के स्कूल पहुंचना पड़ा। ऐसा ही हाल डालनवाला निवासी अलका कुकरेती का रहा। उन्हें अपने बेटे को सेंट जोजेफ्स स्कूल से लाने और छोड़ने में परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं स्कूल संचालकों ने कहा कि तय समय में बोर्ड की परीक्षा कराई गई।
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