स्कूल में छात्र की मौत, अस्पताल ले जाने के बजाए परिजनों के आने का इंतजार करता रहा स्कूल प्रशासन
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यहां मनेरा स्थित ऋषिराम शिक्षण संस्थान में कक्षा 12वीं के छात्र की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में मौत हो गई। हद तो यह है कि छात्र की हालत बिगड़ने पर स्कूल प्रशासन उसे तत्काल इलाज उपलब्ध कराने क की व्यवस्था नहीं की।
छात्र का घर करीब तीन किमी दूर होने के बावजूद स्कूल प्रबंधन परिजनों के स्कूल पहुंचने का इंतजार करता रहा। परिजनों ने छात्र की मौत के लिए स्कूल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उनके बच्चे को समय से इलाज मिल जाता तो उसकी जान नहीं जाती।
मिली जानकारी के मुताबिक बरसाली गांव निवासी राकेश बिष्ट का पुत्र आयुष बिष्ट (17 वर्ष) रोज की तरह बुधवार सुबह भी स्कूल पहुंचा था। स्कूल पहुंचने के कुछ देर बाद ही स्कूल में उसकी तबीयत बिगड़ गई।
उसेे उल्टी हो रही थी। विद्यालय प्रशासन की ओर से छात्र के परिजनों को सूचना देकर बुला लिया गया। परिजनों ने तुरंत स्कूल पहुंचकर आयुष को जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
छात्र के चाचा सुधीर बिष्ट ने स्कूल प्रशासन और डाक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि घर से स्कूल की दूरी लगभग तीन किमी होने से उन्हें स्कूल पहुंचने में देर हो गई थी। अगर स्कूल प्रशासन द्वारा बच्चे को पहले ही अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो उसकी जान नहीं जाती। उन्होंने डाक्टरों पर भी इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
छात्र को उल्टी करता देख परिजनों को सूचित कर दिया गया था। स्कूल प्रशासन के पूछने पर छात्र ने कोई गंभीर समस्या नहीं बताई थी, जिस वजह से उसे अस्पताल नहीं भेजा गया। अगर हमें हालात गंभीर लगते तो हम स्वयं ही छात्र को अस्पताल भेज देते।
-शिव सिंह रावत, प्रधानाचार्य, ऋषिराम शिक्षण संस्थान
बच्चे को सुबह 10 बजे अस्पताल लाया गया। मैने परिजनों से बच्चे का ईसीजी कराने को कहा था, लेकिन डेढ़ घंटे तक बच्चे का ईसीजी नहीं कराया गया। करीब साढ़े 11 बजे उसकी मौत हो गई थी। पूरा सिस्टम ही खराब है। जिला अस्पताल में एक कॉर्डियोलॉजिस्ट तक नहीं है।
-डा. एसडी सकलानी, सर्जन, जिला अस्पताल